Amritsar Train Accident,the Victims Of The Train Accident Protests In Amritsar – अमृतसर ट्रेन हादसाः सिद्धू दंपती के खिलाफ पीड़ितों का प्रदर्शन, वादों से मुकरने का लगाया आरोप


मृतकों के परिजनों ने किया प्रदर्शन
– फोटो : अमर उजाला

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जौड़ा फाटक रेल हादसे में अपनों को खोने वाले पीड़ितों ने मंगलवार को पूर्व मंत्री नवजोत सिद्धू और उनकी पत्नी डॉ. नवजोत सिद्धू के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी हाथों में सिद्धू दंपति और दशहरा कार्यक्रम को आयोजित करने वाले पार्षद मिट्ठू मदान के विरुद्ध बैनर उठा रखे थे। बैनर पर इन तीनों की फोटो पर क्रॉस का निशान लगाकर, इनको रेल हादसे का मुख्य जिम्मेदार ठहराया गया। 

पीड़ित परिवार उसी ट्रैक पर अपना प्रदर्शन करना चाहते थे, जहां त्रासदी हुई थी। रेलवे प्रशासन ने जौड़ा फाटक रेल ट्रेक के आसपास बोर्ड लगा दिया था कि रेल ट्रैक पर बैठना रेलवे कानून का उल्लंघन है। कानून का उल्लंघन करने वाले लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। इससे बावजूद प्रदर्शनकारी रेल ट्रैक की तरफ बढ़ने का प्रयास करने लगे।

 वहां पर तैनात 150 से अधिक जीआरपी और पंजाब पुलिस के जवानों व अधिकारियों ने उनको रोक दिया। पुलिस ने जौड़ा फाटक की तरफ जाने वाले सभी रास्तों में अवरोध लगाए हुए थे। इन सभी रास्तों में भारी पुलिस बल भी तैनात था। इसके बाद गुस्साए लोगों ने जौड़ा फाटक से कुछ दूरी पर बैठ कर सुबह दस बजे से दोपहर दो बजे तक सिद्धू दंपति व पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

पीड़ित परिवारों की अगुवाई कर रहे दीपक कुमार ने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगे नहीं मानती तब तक धरना नहीं उठाया जाएगा। पीड़ित परिवारों की मांग की थी कि हादसे में मारे गए लोगों के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, छोटे बच्चों की शिक्षा का प्रबंध, जिन परिवारों में कमाने वाले नहीं रहे उनको गोद लेने के अपने वादों को सिद्धू पूरा करें। इस घटना के जिम्मेदारों सिद्धू दंपति, मिठू मदान और रेल कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज किए जाने की भी मांग की गई।

जिला प्रशासन ने इन प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत करने के लिए एसडीएम विकास हीरा को भेजा। एसडीएम ने प्रदर्शनकारियों को धरना  खत्म करने के लिए कई बार समझाया लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे। वहां मौजूद एक अकाली नेता ने प्रशासन और धरना देने वालों के बीच समझौते का प्रस्ताव रखा तो वह भड़क गए।

बाद में राजनीतिक दलों के नेताओं के आश्वासन के बाद लोग 22 अक्तूबर तक धरना स्थगित करने के लिए मान गए। चेतावनी दी गई कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगें स्वीकार न की तो सभी नेता दलगत राजनीति से ऊपर उठ कर उनका साथ देंगे।

सिद्धू अपने घर में थे मौजूद 
रेल हादसे में मारे गए लोगों के परिजन जब जौड़ा फाटक के नजदीक विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, तो उस समय सिद्धू अपने होली सिटी निवास स्थान पर बैठे हुए थे।

सरकार पीड़ितों से किए वादे पूरे करे : खैरा 
प्रदर्शनकारियों के साथ तालमेल करने के लिए कई दलों के नेता भी जौड़ा फाटक पहुंचे। पंजाब एकता पार्टी के प्रधान सुखपाल सिंह खैरा ने कहा कि पंजाब सरकार ने इन पीड़ित परिवारों से जो वादे किए हैं, उसे पूरा किया जाना चाहिए। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता मनदीप मन्ना ने उपस्थित अकाली नेताओं से कहा कि पीड़ित परिवारों के बच्चों की शिक्षा का प्रबंध एसजीपीसी द्वारा संचालित स्कूलों में करने के लिए वह प्रयास करें। 

जौड़ा रेल हादसे के पीड़ित परिवार की अमन ने बताया कि इस हादसे में उनके पति की मौत हुई है। उनको पांच लाख रुपये की राशि मिली है। पूर्व मंत्री नवजोत सिद्धू और उनकी पत्नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू ने उनके परिवारों के साथ बड़े-बड़े वादे किए थे। एक साल बीत गया न तो नवजोत सिद्धू और न ही उनकी पत्नी कभी उनकी दहलीज पर आए। 

दोनों को इस बात की थोड़ी भी शर्म नहीं है कि मारे गए लोगों के परिजन कैसे अपना पेट भरते होंगे। कैसे उनके बच्चे पढ़ते होंगे। दुख तो इस बात का है कि सरकार ने जिस कमेटी को जांच जिम्मेदारी सौंपी थी, उसने इस घटना का दोषी किसे ठहराया, इस बात की उन्हें एक साल बीत जाने के बाद भी जानकारी नहीं मिली है।

सिद्धू के घर से नहीं मिला इंसाफ, इसलिए लगाया धरना
हादसे में अपने पिता गुरिंदर और चाचा पवन को खो चुके दीपक ने बताया कि इंसाफ लेने और किए वादों को पूरा करने के लिए नवजोत सिद्धू के घर का दरवाजा कई बार खटखटाया गया। कभी जवाब मिला कि सिद्धू मुंबई में हैं। कभी सिद्धू दिल्ली में मीटिंग के लिए गए हैं।

उनके निजी सचिव गौरव सहदेव ने कई बार झूठे आश्वासन दिए कि मारे गए लोगों के परिजनों की नौकरी के लिए प्रयास किया जा रहे है। इस घटना के बाद सिद्धू दंपति ने उन लोगों से मुंह मोड़ लिया जिन्होंने उन्हें वोट दिया था। सिद्धू के घर से इंसाफ न मिलने के कारण ही पीड़ित परिवारों ने धरना लगाने का निर्णय किया है।

नवजोत सिद्धू हैं जिम्मेदार : राजकुमार   
20 साल के हर्ष की मौत ने उसके दिव्यांग पिता राजकुमार के बुढ़ापे की लाठी छीन ली है। वह कहते हैं कि हर्ष इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था। सरकार ने सिर्फ दिखावा किया। हादसे के कसूरवार दशहरा उत्सव के आयोजक मिट्ठू मदान और नवजोत कौर सिद्धू हैं।

नवजोत कौर सिद्धू तब तक आयोजन में नहीं पहुंचीं जब तक भीड़ इकट्ठी न हो गई। यदि वह समय पर आ जातीं तो शायद सबकी जान बच जाती। हादसे के 15 दिन बाद नवजोत सिंह सिद्धू के आवास पर गया था। सिद्धू ने मुझसे कहा कि आपके लिए मेरे घर के दरवाजे हमेशा खुले हैं। हालांकि सिद्धू दंपति हादसे के बाद कभी भी जौड़ा फाटक क्षेत्र में नहीं आए।

जौड़ा फाटक रेल हादसे में अपनों को खोने वाले पीड़ितों ने मंगलवार को पूर्व मंत्री नवजोत सिद्धू और उनकी पत्नी डॉ. नवजोत सिद्धू के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी हाथों में सिद्धू दंपति और दशहरा कार्यक्रम को आयोजित करने वाले पार्षद मिट्ठू मदान के विरुद्ध बैनर उठा रखे थे। बैनर पर इन तीनों की फोटो पर क्रॉस का निशान लगाकर, इनको रेल हादसे का मुख्य जिम्मेदार ठहराया गया। 

पीड़ित परिवार उसी ट्रैक पर अपना प्रदर्शन करना चाहते थे, जहां त्रासदी हुई थी। रेलवे प्रशासन ने जौड़ा फाटक रेल ट्रेक के आसपास बोर्ड लगा दिया था कि रेल ट्रैक पर बैठना रेलवे कानून का उल्लंघन है। कानून का उल्लंघन करने वाले लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। इससे बावजूद प्रदर्शनकारी रेल ट्रैक की तरफ बढ़ने का प्रयास करने लगे।

 वहां पर तैनात 150 से अधिक जीआरपी और पंजाब पुलिस के जवानों व अधिकारियों ने उनको रोक दिया। पुलिस ने जौड़ा फाटक की तरफ जाने वाले सभी रास्तों में अवरोध लगाए हुए थे। इन सभी रास्तों में भारी पुलिस बल भी तैनात था। इसके बाद गुस्साए लोगों ने जौड़ा फाटक से कुछ दूरी पर बैठ कर सुबह दस बजे से दोपहर दो बजे तक सिद्धू दंपति व पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।





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