article 370 latest news: जम्मू-कश्मीर पर कांग्रेस की ‘यंग ब्रिगेड’ ने पकड़ी राहुल से अलग राह – young brigade of congress expressed separate views from rahul gandhi on abrogation of article 370


कांग्रेस के युवा नेताओं ने आर्टिकल 370 पर किया मोदी सरकार का समर्थन।

सी एल मनोज, नई दिल्ली

कांग्रेस पार्टी के अंदर नाराजगी के नए संकेत मिल रहे हैं। मोदी सरकार के जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा वापस लेने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने के बड़े फैसले को लेकर ‘टीम राहुल’ के सदस्यों के तौर पर पहचाने जाने वाले कांग्रेस के युवा नेताओं की पार्टी नेतृत्व के रुख से अलग राय सामने आई है।

इन युवा नेताओं की ‘नाराजगी’ ऐसे समय में सामने आई है जब कांग्रेस में ‘युवा बनाम उम्रदराज’ की खींचतान चल रही है। कांग्रेस वर्किंग कमिटी की शनिवार को मीटिंग होनी है और इसमें पार्टी के नए अध्यक्ष को चुना जा सकता है। मोदी सरकार के जम्मू-कश्मीर पर कदम उठाने के बाद से कांग्रेस के युवा नेता ऐसे बयान दे रहे हैं जो विपक्षी दल के तौर पर पार्टी के पक्ष से अलग हैं। ऐसे बयान ट्विटर के साथ ही पार्टी में आंतरिक तौर पर दिए गए हैं।

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जम्मू और कश्मीर पर पार्टी के प्रतिकूल बयान देने वालों में ज्योतिरादित्य सिंधिया, मिलिंद देवड़ा, दीपेन्द्र हुड्डा, जितिन प्रसाद, आर पी एन सिंह, ज्योति मिर्धा, रंजीता रंजन और अदिति सिंह शामिल हैं। इन सभी नेताओं की पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से नजदीकी थी और इनमें से अधिकतर ने अपने परिवार के दम पर राजनीति में कदम रखा है।

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जितिन प्रसाद, दीपिंदर हुड्डा, अदिति सिंह, मिलिंद देवड़ा, आरपीएन सिंह, ज्योति मिर्धा, रंजीता रंजन और ज्योतिरादित्य सिंधिया।

ऑल इंडिया कांग्रेस कमिटी के महासचिव गुलाम नबी आजाद से इन युवा नेताओं के जम्मू और कश्मीर पर नजरिए के बारे में पूछने पर, उनका कहना था, ‘इन नेताओं को जम्मू और कश्मीर और कांग्रेस का इतिहास पढ़ने की जरूरत है और तब उन्हें पार्टी में रहना चाहिए।’ हालांकि, कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने सरकार के इस कदम का वैचारिक, राजनीतिक और संवैधानिक आधार पर विरोध किया है। इन नेताओं में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और मनमोहन सिंह शामिल हैं।

कांग्रेस नेतृत्व राज्यसभा के चीफ व्हिप भुवनेश्वर कलिता के इस्तीफे से हैरान है। पार्टी से अलग राय देने वाले वरिष्ठ नेताओं में जनार्दन द्विवेदी और करण सिंह जैसे नाम शामिल हैं जो सक्रिय राजनीति से दूर हैं या उन्हें किनारे कर दिया गया है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘प्रत्येक राजनीतिक दल में ऐसे नेता होते हैं जो वैचारिक और राजनीतिक जुड़ाव के कारण आए हैं और आंदोलनों के जरिए आगे बढ़े हैं। इसके अलावा ऐसे नेता भी होते हैं जो फायदे के लिए राजनीति में आते हैं।’



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