Athiya Shetty: लिंकअप की खबरों पर पापा कहते हैं, चिल करो: अथिया शेट्टी – actress athiya shetty talks about her films and career


आथिया शेट्टी की एंट्री फिल्म ‘हीरो’ के जरिए गाजे-बाजे के साथ हुई थी, उसके बाद वह सिर्फ ‘मुबारकां’ में नजर आई। इन दिनों मोतीचूर से चर्चा में आथिया से करियर पर हुई खास बातचीत:

नवाज एक जाने-माने समर्थ अभिनेता हैं। उनकी मौजूदगी में आपको उनसे ओवरपावर होने का डर नहीं लगा?

ईमानदारी से कहूं तो जब मैंने स्क्रिप्ट पढ़ी तो मुझे ऐसा बिलकुल नहीं लगा क्योंकि फिल्म की कहानी एक लड़की की है। फिल्म में लड़की को शादी करनी होती है। उसी की जिंदगी चकनाचूर होती है। ये कहानी लड़की के नजरिए से है। मैं आपको ये भी बता दूं कि अगर इसमें मैं अकेली होती, तब भी बात नहीं बनती या सिर्फ नवाज होते तब भी मुश्किल था। इस फिल्म में हम दोनों का किरदार बहुत अहम है। एक तरह से हम एक-दूसरे के पूरक हैं। मैं बहुत सचेत थी कि मेरे ऑपोजिट नवाज हैं। मुझे अपनी डायलॉग डिलिवरी पर काम करना होगा। अपनी वर्कशॉप चाक-चौबंद रखनी होगी। मैंने इस भूमिका के लिए खूब तैयारी की। तैयारी से रोल करें तो मजा कुछ और ही होता है।

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आपकी फिल्म शादी जैसे विषय पर आधारित है। हमारे देश में शादी के मामले में लड़की को किसी सामान की तरह पेश किया जाता है। वे चाल-ढाल, रूप-रंग किसी भी मामले में रिजेक्ट की जा सकती हैं?

मैं जब भी ये सुनती हूं कि लड़कियों को उनके रंग के कारण नकार दिया गया है या फिर शादी की बात करते समय उसे चलकर दिखाने के लिए कहा जाता है या गाना गाकर सुनाने के लिए तो मुझे बहुत दुख होता है। असल में ये सब कुछ एजुकेशन के अभाव में होता है। अगर लड़की पढ़ी-लिखी और आत्मनिर्भर हो, तो फिर वो ये सारी चीजें करने पर मजबूर नहीं होगी। उसे शादी इसलिए नहीं करनी पड़ेगी कि कोई उसका भार वहन कर सके।

‘हीरो’ में आपकी लॉन्चिंग बहुत जोर-शोर से हुई थी, मगर आपका करियर रफ्तार से आगे नहीं बढ़ पाया?

मुझे लगता है हर किसी की अपनी जर्नी होती है। आप फिर किस्मत को भी नकार नहीं सकते। हर किसी का एक टाइम होता है और टाइम आता है। हमारे पेशे में सब्र बहुत जरूरी है। आधी जंग इंतजार की होती है। अगर आप आत्मविश्वास से ओत-प्रोत हो, मेहनत करने के लिए तैयार हो तो आपको मौका जरूर मिलेगा। अब जैसे मुझे मोतीचूर का मौका मिला तो मैंने झपट लिया। बस आपको मौके के लिए तैयार रहना पड़ता है।

मूवी रिव्यू: मोतीचूर चकनाचूरमूवी रिव्यू: मोतीचूर चकनाचूर

अपने अलग लुक के कारण आपको बॉलिवुड में काम मिलने में दिक्कत आई?

मैं समझती हूं कि अब हिंदी फिल्मों में नायिका लुक के मामले में अपने बने-बनाए खांचे से बाहर आ रही है। अब नेटफ्लिक्स के शोज या वर्ल्ड सिनेमा के एक्सपोजर के कारण दर्शक अलग-अलग तरह की अभिनेत्रियों से वाकिफ हो रहे हैं। हालांकि हीरोइनों के लिए ये राह इतनी आसान नहीं है, मगर दर्शकों की सोच धीरे-धीरे बदल रही है। अगर आप प्रतिभाशाली हैं और अभिनय जानती हैं, तो आपको आपके हिस्से के किरदार जरूर मिलेंगे। मैं तो अपने लुक्स और अंदाज को लेकर कॉन्फिडेंट हूं।

अपने पिता सुनील शेट्टी के साथ आप एक बेहद ही प्यारा और मजबूत रिश्ता शेयर करती हैं। अभिनेत्री बनने के बाद उस रिश्ते में कितनी परिपक्वता आई है?

अब मैं उनके साथ उतना वक्त नहीं बिता पाती, मगर हमारा रिश्ता काफी मजबूत हुआ है। वह मेरे दोस्त जैसे हैं। मैं उनसे कोई भी बात शेयर कर सकती हूं। वह मेरे सबसे बड़े आलोचक हैं।

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क्रिकेटर के एल राहुल से आपके लिंकअप की खबरें भी खूब चल रही हैं?

मैं इन खबरों को गंभीरता से नहीं लेती। जब इस तरह की न्यूज ज्यादा चलती है, तो मैं तनाव में आ जाती हूं, मगर मम्मी-पापा समझाते हैं कि चिल करो, इग्नोर करो।

लड़की होने के नाते आपके लिए जिंदगी और करियर की जंग मुश्किल रही है?

देखिए, इंडस्ट्री में तो मुझे अपनी जंग खुद ही लड़ी पड़ी है। आपको आखिरकार खुद को साबित करना ही पड़ता है, मगर जहां तक मेरे अपने घर की बात है, तो हमारे घर में लड़के-लड़की के बीच कभी भेदभाव नहीं किया गया। मेरे दादा ने हमेशा ये बात सुनिश्चित की कि चाहे कुछ भी हो जाए, जो लड़कों को मिलेगा, वही लड़कियों का अधिकार होगा। जो अहान (उनके भाई) को मिलेगा, वही आथिया को। अहान से उनकी जो अपेक्षाएं हैं, वही मुझसे हैं। घरवालों ने मुझे मैं लड़की हूं, नाजुक हूं, जैसे नजरिए से कभी ट्रीट नहीं किया। ‘हीरो’ के बाद मेरी शूटिंग खत्म हो गई थी और मैं घर पर थी, तो मेरे दादा रोज आकर मुझसे पूछते, ‘आज काम पर नहीं जाना है क्या?’ मैं कहती, ‘दादा शूटिंग खत्म हो गई, तो वह कहते, ‘काम पर रोज जाना चाहिए।’ बेटा और बेटी को बराबरी का दर्जा देने की परंपरा हमारे परिवार में पुरानी है। मेरे पापा की दो बहनें हैं। जब पापा छोटे थे, तब हालात ऐसे थे कि दो लोगों को पढ़ने के लिए विदेश भेजा जा सकता था और दादा ने दोनों बेटियों को भेजा।

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