Australia bushfire: ऑस्ट्रेलिया के जंगलों की आग पर काफी हद तक काबू, जानवरों के लिए बरसाई जा रही सब्जियां – australian forest fire under control wet weather promises further respite



Published By Smita Mugdha | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

जंगल में लगी आग बुझाने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास

सिडनी

ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी भीषण आग को नियंत्रित करने के काम में जुटे दमकल कर्मियों ने बताया कि सोमवार को उस पर काफी हद तक काबू पाया गया। यहां बारिश होने की संभावना है, जिससे उम्मीद की जा सकती है कि जंगल की आग से बरबाद हुए ग्रामीण इलाकों को कुछ राहत जरूर मिलेगी। ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी आग बुझाने के लिए दुनियाभर में प्रार्थना भी की जा रही है।



आग बुझाने के प्रयास अब सफल होते दिख रहे
दमकलकर्मियों का कहना है कि न्यू साउथ वेल्स और विक्टोरिया राज्य के जंगलों में लगी आग पर बहुत हद तक काबू पाया जा चुका है। यहां पिछले करीब चार महीने से आग लगी है। न्यू साउथ वेल्स ग्रामीण दमकल सेवा के कमिश्नर शेन फिट्जसिमोंस ने सोमवार को इस क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने कहा कि कुछ हिस्से अब भी जल रहे हैं लेकिन आग बुझाने के प्रयास अब सफल होते दिख रहे हैं।

4 महीने से झुलस रहे हैं ऑस्ट्रेलिया के जंगल

  • 4 महीने से झुलस रहे हैं ऑस्ट्रेलिया के जंगल

    ऑस्ट्रेलिया के जंगल में लगी आग पिछले 4 महीने से जारी है। इस आग में जंगल में रहनेवाले 48 करोड़ जानवरों को काफी नुकसान पहुंचा है। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने राहत पैकेज के ऐलान के साथ ही वन्य जीवों के संरक्षण के लिए खास कार्यक्रम का भी ऐलान किया है। इन दिनों शुरू हुई बारिश आग बुझाने के लिए आसमान से उतरी राहत की तरह है।

  • आधी रह गई कोआला की संख्या

    ऑस्ट्रेलिया के जंगल में लगी आग के कारण वन्य प्रजातियों पर बहुत बुरा असर पड़ा है। सिडनी यूनिवर्सिटी के इकोलॉजिस्ट का अनुमान है कि करीब 48 करोड़ पशु-पक्षी, वन्य प्रजाति आग में जल चुके हैं। जंगल में लगी आग का सबसे बुरा प्रभाव कोआला भालू पर पड़ा है, इनकी संख्या आधी रह गई है।

  • कोआला को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन

    कोआला (Koala) ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में वृक्षों पर रहनेवाला दुर्लभ प्रजाति का जानवर होता है। फैसकोलार्कटिडाए (Phascolarctidae) प्रजाति का कोआला आखिरी दुर्लभ जानवर है। मुख्य तौर पर यह पूर्वी और दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया के तटवर्ती क्षेत्रों में मिलता है। कई समाजसेवी संस्थाएं कोआला प्रजाति के भालू को बचान के लिए इस वक्त ऑस्ट्रेलिया में काम कर रहे हैं।

  • ​वन्य प्रजातियों को आग के कारण काफी नुकसान

    चार महीने पहले ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी आग अब तक बुझाई नहीं जा सकी है। यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी के इकोलॉजिस्ट का अनुमान है कि अब तक 48 करोड़ जानवरों की मौत आग में झुलसने से हुई है। मौत होनेवाले जानवरों में स्तनधारी पशु, पक्षी और रेंगने वाले जीव सभी शामिल हैं। तस्वीर: ऑस्ट्रेलिया से सटे न्यू जीलैंड के हिस्से में जानवरों के लिए लगाए रेस्क्यू कैंप की

  • ​प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने की राहत पैकेज की घोषणा

    ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने राहत पैकेज की घोषणा की। उन्होंने राहत पहुंचाने के लिए एक नई एजेंसी के जरिए 2 अरब डॉलर खर्च करने का ऐलान किया है।

  • रिहाइशी इलाकों की ओर भागे जानवर

    जंगल में तापमान बढ़ने के बाद से रिहाइशी इलाकों की ओर जानवरों के भागने का क्रम जारी है। जान बचाने के लिए भाग रहे जानवरों को सुरक्षित रखने के लिए कई जगह पर कैंप और इलाज की व्यवस्था की गई है।

  • शहरों की ओर भागे कंगारू

    ऑस्ट्रेलिया के जंगल में लगी आग का बुरा प्रभाव राष्ट्रीय पशु कंगारू पर भी पड़ा है। जंगल जलकर खाक हो गए और कई हिस्सों में कंगारू शहर की ओर भागे हैं।



भूखे जानवरों के लिए सब्जी की बारिश


जंगल में फंसे भूखे जानवरों के लिए हेलिकॉप्टर के जरिए सब्जियां और फल गिराए जा रहे हैं। जंगल की आग में सबसे अधिक नुकसान जानवरों और विभिन्न पक्षियों की प्रजाति को हुआ है। पर्यावरण और ऊर्जा मंत्री ने कहा कि आग पर काबू पाने के साथ ही हमारी प्राथमिकता है कि हम अधिक से अधिक संख्या में जानवरों, पक्षियों और वन्य प्रजातियों को भी बचा सकें।

ऑस्ट्रेलिया के जंगल में लगी भयानक आग

  • ऑस्ट्रेलिया के जंगल में लगी भयानक आग

    ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने पर्यटकों को आगाह किया है कि तेज हवा चलने के कारण जंगलों में लगी आग फैल सकती है। इसके साथ ही सरकार ने दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र में मौजूद हजारों पर्यटकों को 48 घंटे के भीतर क्षेत्र खाली करने का आदेश दिया है।

  • 7 दिनों का लगाया आपातकाल

    न्यू साउथ वेल्स और विक्टोरिया राज्य के जंगलों में लगी आग ने घरों को तबाह कर दिया और इसके कारण हजारों लोग तथा पर्यटक तटीय क्षेत्र की ओर जाने पर मजबूर हो गए। सोमवार से जंगल की आग की वजह से सात लोगों की मौत हो चुकी है। न्यू साउथ वेल्स ने 7 दिनों के आपातकाल का ऐलान किया है।

  • युद्ध स्तर पर चलाया जा रहा अभियान

    ऑस्ट्रेलिया की आग को काबू में लाने के लिए युद्ध स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। आग नियंत्रित करने के लिए हेलिकॉप्टर के जरिए हो रहे हैं प्रयास।

  • बहादुर वॉलिंटियर ने दी जान, बेटे को मिला बैज

    रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे जेफरी केटन शहीद हो गए। आरएफएस ने जेफरी के पुत्र को बैज देकर सम्मानित किया। वॉलिंटियर जेफरी के अंतिम संस्कार में बड़े पैमाने पर लोग जुटे।

  • कई घर आग में जलकर हुए खाक

    ऑस्ट्रेलिया के दक्षिण पूर्वी तट पर साउथ वेल्स और विक्टोरिया राज्यों में तबाही मचाई है। मलाकूटा शहर के करीब 4,000 लोग भागकर तट की ओर चले गए, क्योंकि हवा की दिशा की वजह से आग उनके घरों तक पहुंच रही है। एनएसडब्ल्यू परिवहन मंत्री एंड्रयू कॉन्स्टेंस ने सार्वजनिक प्रसारक एबीसी को बताया कि क्षेत्र में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में लोगों को हटाया जा रहा है।

  • 40 के पार जा सकता है तापमान

    न्यू साउथ वेल्स ग्रामीण दमकल सेवा ने बेटमैन बे से लेकर पड़ोसी विक्टोरिया राज्य तक के 200 किमी के क्षेत्र से पर्यटकों को जाने को कह दिया था। पर्यटकों से कहा गया है कि वे शनिवार से पहले वहां से निकल जाएं क्योंकि तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार जा सकता है और तेज हवाएं चल सकती हैं।

पिछले 4 महीने से लगी है जंगलों में आग

ऑस्ट्रेलिया के जंगल में लगी आग अब लगातार बढ़ती जा रही है। पिछले कई दिनों से जंगल में लगी आग को बुझाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं। 4 महीने से जारी इस आग में करीब 50 करोड़ पशु-पक्षी जलकर मर चुके हैं या गंभीर तौर पर उन्हें नुकसान पहुंचा। आग का सबसे बुरा प्रभाव कोआला (जानवरों की एक प्रजाति) पर पड़ा है। न्यू साउथ वेल्स के मध्य-उत्तरी इलाके में सबसे अधिक कोआला रहते हैं। जंगलों में लगी आग की वजह से उनकी आबादी में भारी गिरावट आई है।



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