caa protest: CAA पर चिदंबरम की पीएम मोदी को चुनौती, बीजेपी नेता ने कहा- राहुल गांधी जैसी है चिदंबरम की बुद्धि – chidambaram’s intellect at par with that of rahul gandhi, says bjp leader gvl narasimha



Published By Naveen Kumar Pandey | एएनआई | Updated:

चिदंबरम और जीवीएल नरसिम्हा राव।

नई दिल्ली

पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम के नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बहस की चुनौती देने के बाद बीजेपी के निशाने पर आ गए हैं। बीजेपी नेता जीवीएल नरसिम्हा राव ने ने कहा कि चिदंबरम ने सीएए पर बहस की चुनौती देकर अपनी समझ राहुल गांधी जैसी ही बना ली है। राव ने कहा, ‘चिदंबरम खुद को विश्वस्तरीय विद्वान समझते हैं, लेकिन सीएए का विरोध कर उन्होंने अपनी समझ का स्तर राहुल गांधी जैसा ही कर लिया।’

राव ने कहा, ‘सोनिया गांधी, राहुल गांधी और पी. चिदंबरम सीएए पर झूठ बोल रहे हैं और देश की जनता को भ्रमित कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा, ‘सीएए का विरोध करने वाले पाकिस्तान की भाषा बोल रहे हैं। जब पाकिस्तान अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित करने के लिए दुनिया में बेनकाब हो रहा है तो सीएए का विरोध करने वाले उसका नजरिया आगे बढ़ा रहे हैं।’

इससे पहले चिदंबरम ने प्रधानमंत्री मोदी से सीएए के मुद्दे पर टीवी पर बहस करने की चुनौती दी थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री इस मुद्दे पर किसी सवाल का जवाब नहीं देना चाहते हैं। कांग्रेस नेता ने कहा कि मोदी के इसी रवैये से देशभर में प्रदर्शन हुए। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘पीएम का कहना है कि सीएए का मतलब नागरिकता देना है, इसे छीनना नहीं। हम में से कई का मानना है कि सीएए (एनपीआर या एनआरसी के साथ मिलकर) कई व्यक्तियों को ‘गैर-नागरिक’ घोषित करेगा और नागरिकता ले जाएगा।’ चिदंबरम ने पीएम पर सवालों से भागने का आरोप लगाया और कहा, ‘पीएम उच्च मंच से मूक दर्शकों से बात करते हैं और सवाल नहीं लेते। हम मीडिया के माध्यम से बात करते हैं और मीडिया के लोगों से सवाल को लेकर तैयार रहते हैं।’

उन्होंने आगे लिखा, ‘लोगों को चर्चा को सुनने और सीएए पर अपने निष्कर्ष पर पहुंचनें दें। मुझे पूरी उम्मीद है कि पीएम इस सुझाव पर अनुकूल प्रतिक्रिया देंगे।’

नागरिकता (संशोधन) कानून, 2019 में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के पांच अल्पसंख्यक समुदायों के भारत आए शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान करने का प्रवाधान किया गया है। कानून के तहत 31 दिसंबर, 2014 तक भारत में शरण ले चुके इन तीनों पड़ोसी देशों के हिंदू, सिख, बौध, जैन और पारसी समुदाय के लोगों को नागरिकता मिल जाएगी।



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