corona cases in india till now: कोरोना वायरस: भारत के लिए बड़ा खतरा है यह महामारी, जापान जैसे देशों में आई कमी – coronavirus spread why india is at high risk



Published By Satyakam Abhishek | टाइम्स न्यूज नेटवर्क | Updated:

भारत में कोरोना के मामले बढ़े
हाइलाइट्स

  • भारत में कोरोना के अब तक 519 मामले आए सामने
  • कोरोना को देखते हुए पीएम मोदी ने कल मध्यरात्रि से पूरे देश में 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा की
  • कोरोना के कारण देश में 10 लोगों की मौत हुई है
  • जापान, दक्षिण कोरिया जैसे देशों में कोरोना के मामले में आई है कमी

नई दिल्ली

भारत में कोरोना वायरस के बढ़ते मामले को देखते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कल मध्यरात्रि से पूरे देश में 21 दिनों के लिए लॉकडाउन की घोषणा कर दी है। पीएम ने सोशल डिस्टेसिंग का हवाला देते हुए इस खतरनाक बीमारी से लड़ने के लिए इसे जरूरी बताया। भारत जैसे सघन आबादी वाले देश में यह बीमारी तबाही मचा सकती है। हालांकि जापान, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर जैसे कुछ देशों ने इस वायरस को फैलने से रोकने में बड़ी सफलता पाई है। पर भारत जिस तेजी से यह वायरस फैल रहा है, उसमें यह हाई रिस्क पर है।

आइए समझते हैं कि कैसे कुछ देश इस जानलेवा वायरस से निपटने के प्रयास कर रहे हैं। कोरोना महामारी को समझने के लिए इसे दो फेज में बांटते हैं। पहले फेज में पहले 100 मामले और फिर पहले 100 मामले के बाद हर केस को दूसरे फेज में बांटते हैं। इस डेटा के अध्ययन से पता चलता है कि किन देशों ने कोरोना के फैलाव को रोकने में सफलता पाई।



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जापान ने कोरोना को रोका


जापान में कोरोना के पहले 100 केस आने तक यहां रोजाना 13% के औसत से पीड़ितों की संख्या बढ़ रही थी। 100 केस के बाद रोजाना पीड़ितों की संख्या घटकर 8.1% हो गया। केवल जापान ही नहीं बल्कि, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर ने भी कोरोना के मामलों रोक लगाने में काफी हद तक सफलता पाई है।

कोरोना भारत के लिए है बड़ा खतरा

भारत समेत 23 देशों में कोरोना केस के मामले में स्थिति ठीक नहीं है। इन देशों में पहले 100 मामलों के बाद कोरोना के मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि देखी गई। रिपोर्ट के अनुसार, इन देशों में या तो कोरोना को रोकने को लेकर कदम नहीं उठाए गए हैं या फिर वे असफल हो रहे हैं।



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कोरोना का संक्रमण कितना भयानक, पीएम मोदी ने बताया

पीएम मोदी ने मंगलवार को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कोरोना महामारी को बेहद खतरनाक बताया था। उन्होंने कहा था, ‘पहले एक लाख लोग संक्रमित होने में 67 दिन लगे और फिर इसे दो लाख लोगों तक पहुंचने में सिर्फ 11 दिन लगे। ये और भी भयावह है कि दो लाख संक्रमित लोगों से तीन लाख लोगों तक ये बीमारी पहुंचने में सिर्फ चार दिन लगे।’ भारत में पहले 40 दिनों में कोरोना वायरस के एक से लेकर 50 तक मामले सामने आए थे। फिर चार दिनों में देश में संक्रमित मरीजों की संख्या 50 से बढ़कर 100 तक हो गई। अगले चार दिनों में कोरोना केस की संख्या 100 से बढ़कर 150 पर पहुंच गई। इसके बाद से कोरोना के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी। देश में अभी कोरोना के 519 मरीज हैं और 10 लोगों की मौत हुई है।

इटली में केसों में आई कमी

अगर अमेरिका, स्पेन और फ्रांस से इटली की तुलना करें तो इटली ने कुछ हद तक शुरू के 100 केस के बाद इस वायरस के फैलाव को रोकने में सफलता पाई है। लेकिन बड़े पैमाने के इस महामारी के फैलने के कारण अभी अपेक्षित सफलता उसे नहीं मिली है।

सिंगापुर, दक्षिण कोरिया ने कुछ यूं सफलता पाई

चीन, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया और जापान में पहले के 100 केस के बाद मामलों में कमी आई है। पश्चिमी यूरोप, अमेरिका और भारत की तुलना में इन देशों ने कोरोना को फैलने से रोकने में सफलता पाई है।

19 देशों में कोरोना के केस में 10 फीसदी तक की कमी

डेनमार्क, आयरलैंड जैसे बड़े आय वाले देशों ने कोरोना के पहले 100 मामले के बाद इसके फैलाव को रोकने में बड़ी सफलता पाई है। हालांकि अगर पश्चिमी यूरोप और पूर्वी एशिया की बात करें तो यहां कोरोना के मामले काफी कम सामने आए हैं।

ईरान में भी मामलों में कमी!

कुछ देशों में शुरू के 100 मामले सामने आने के बाद कोरोना के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी थी लेकिन बाद इसमें तेजी से गिरावट भी दर्ज की गई। इन देशों में ईरान भी शामिल है। चीन के बाद ईरान में कोरोना के सबसे ज्यादा केस सामने आए थे लेकिन 100 केस के बाद यहां कोरोना के संक्रमण में 60% से ज्यादा की कमी दर्ज की गई।

(स्रोत: यूरोपियन सेंट्रल डिजीज प्रिवेंशन ऐंड कंट्रोल, जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी, 24 मार्च सुबह 6 बजे तक के आंकड़े)



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