ghulam nabi ghani: बर्फबारी में फंसे 75 साल के बुजुर्ग, 2 किलोमीटर तक बर्फ ‘चीर’ सेना के जवानों ने बचाई जान – indian army walked 2 km in snow to save life of ghulam nabi ghani


Published By Vishva Gaurav | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

श्रीनगर

एक ओर जहां जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में सेना के जवानों पर पत्थरबाजी जैसी घटनाएं आम हैं, वहीं देश की सुरक्षा संग आम लोगों की सेवा की लिए जानी जाने वाली भारतीय सेना से जुड़ा और विडियो सामने आया है, जिसे देखकर आपको भारतीय सेना पर गर्व होगा।

कुपवाड़ा के लालपोरा में भारी बर्फबारी में फंसे 75 वर्षीय गुलाम नबी गनी को बचाने के लिए सेना के जवानों ने बर्फ को चीरते हुए 2 किलोमीटर की दूरी तय की। कड़ाके की ठंड के बीच बर्फ में फंसे गनी के पास जब सेना पहुंची तो वह काफी गंभीर अवस्था में थे। इसके बाद सेना के जवान गनी को उठाकर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र (पीएचसी) ले गए। इससे जुड़ा विडियो भारतीय सेना की चिनार क्रॉप्स ने शेयर किया है।

हाल ही गर्भवती महिला के लिए ‘देवदूत’ बन गए थी सेना

इसी सप्ताह उत्तरी कश्मीर स्थित बारामुला के तंगमर्ग क्षेत्र के दर्द पोरा गांव निवासी रियाज मीर ने भारतीय सेना के कल्याणकारी दल ‘खैरियत’ को कॉल कर सूचना दी थी कि उसकी पत्नी को प्रसव पीड़ा हो रही है और उसका परिवार भारी बर्फबारी के कारण अस्पताल ले जाने में असमर्थ हैं। इसके बाद उपलोना गांव स्थित सेना के बेस कमांडर बिना समय गंवाए एक स्थानीय चिकित्सा अधिकारी के साथ बर्फ में पांच किलोमीटर पैदल चलकर रियाज मीर के पास पहुंचे थे। इतना ही नहीं, प्रसूता की मदद के लिए तीन इकाइयां बनाई गए थे।

एक दल ने प्रसूता महिला के लिए सड़क का रास्ता साफ किया, दूसरे दल ने हेलिपैड तक बर्फ साफ की और तीसरे ने कनिसपोरा तक बर्फ हटाकर बारामुला जिला मुख्यालय से क्षेत्र को जोड़ने वाला रास्ता साफ किया था। सेना के सौ से अधिक जवानों और 25 नागरिकों ने छह घंटे चले अभियान में हिस्सा लिया था और महिला को स्ट्रेचर पर लिटाकर कमर तक गहरी बर्फ में पैदल ही उपलोना तक ले जाया गया। उपलोना पहुंचकर महिला को सेना की ऐंबुलेंस में सेना के एक चिकित्सा अधिकारी के साथ बारामुला अस्पताल भेज दिया गया। सेना के जवान रास्ते भर ऐंबुलेंस के आगे बर्फ हटाते रहे थे।



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