Gujarat Education Minister Gave Information, Punished Schools Charging Irrelevant Fees – गुजरात के शिक्षा मंत्री ने दी जानकारी, शुल्क वसूलने वाले स्कूलों को करेंगे दंडित



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गुजरात के शिक्षा मंत्री, भूपेंद्र सिंह चुडास्मा ने कहा कि गुजरात सरकार स्कूलों को फिर से खोलने की जल्दी में नहीं है। उन्होंने कहा कि जो स्कूल महामारी के दौरान भी अप्रासंगिक शुल्क वसूल रहे हैं, उन्हें सरकार द्वारा दंडित किया जाएगा। साथ ही उन्होंने उन स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का वादा भी किया है। उन्होंने बताया कि सरकार को विभिन्न अभिभावकों से बहुत सारी शिकायतें मिल रही हैं, जिनके स्कूलों में फीस स्कूलों में अध्ययन बंद होने के बावजूद अप्रासंगिक रूप से वसूल रहे हैं। इस वर्ष रिपोर्ट के अनुसार, 10,000 से अधिक छात्रों से भारी शुल्क लेने के कारण, छात्रों ने सरकारी स्कूलों में प्रवेश लिया है।

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इस साल राजकोट के 298 सरकारी स्कूल दाखिले से भरे हुए हैं। सरकारी स्कूलों में अभिभावकों को छात्रवृत्ति, मुफ्त स्वास्थ्य जांच और अन्य भत्ते ने आकर्षण किया है। राजकोट के स्कूल शिक्षा प्रमुख विपुल मेहता ने जानकारी दी है कि अधिक अभिभावक सरकारी स्कूलों का चुन रहे हैं क्योंकि निजी स्कूलों द्वारा विभिन्न चीजों के लिए जो शुल्क लिया जाता है, वह शुल्क सरकारी स्कूलों में मुफ्त दिया जाता है। अभिभावक सरकार को अत्यधिक शुल्क के बारे में लगातार शिकायत करते रहे हैं, जिसके बाद शिक्षा मंत्री ने इस मामले की जांच करने का वादा किया है और ऐसा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए भी कहा है। मंत्री ने वर्तमान में महामारी की स्थितियों पर विचार करने वाले स्कूलों के पाठ्यक्रम को कम करने की बोर्ड की सोच के बारे में भी बताया है। उन्होंने कहा कि राज्य में एक समिति का गठन किया गया है जो छात्रों के सिलेबस को 20- 30 प्रतिशत तक कम करेगी।

शिक्षा मंत्री ने बताया कि वे राज्य में डॉक्टरों के साथ लगातार बातचीत कर रहे थे, जिन्होंने सलाह दी है कि स्कूल को कुछ समय के लिए बंद रखा जाए क्योंकि अब फिर से पढ़ाई करने से वहां पढ़ने वाले छात्रों के लिए स्वास्थ्य को खतरा हो सकता है।

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गुजरात के शिक्षा मंत्री, भूपेंद्र सिंह चुडास्मा ने कहा कि गुजरात सरकार स्कूलों को फिर से खोलने की जल्दी में नहीं है। उन्होंने कहा कि जो स्कूल महामारी के दौरान भी अप्रासंगिक शुल्क वसूल रहे हैं, उन्हें सरकार द्वारा दंडित किया जाएगा। साथ ही उन्होंने उन स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का वादा भी किया है। उन्होंने बताया कि सरकार को विभिन्न अभिभावकों से बहुत सारी शिकायतें मिल रही हैं, जिनके स्कूलों में फीस स्कूलों में अध्ययन बंद होने के बावजूद अप्रासंगिक रूप से वसूल रहे हैं। इस वर्ष रिपोर्ट के अनुसार, 10,000 से अधिक छात्रों से भारी शुल्क लेने के कारण, छात्रों ने सरकारी स्कूलों में प्रवेश लिया है।

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इस साल राजकोट के 298 सरकारी स्कूल दाखिले से भरे हुए हैं। सरकारी स्कूलों में अभिभावकों को छात्रवृत्ति, मुफ्त स्वास्थ्य जांच और अन्य भत्ते ने आकर्षण किया है। राजकोट के स्कूल शिक्षा प्रमुख विपुल मेहता ने जानकारी दी है कि अधिक अभिभावक सरकारी स्कूलों का चुन रहे हैं क्योंकि निजी स्कूलों द्वारा विभिन्न चीजों के लिए जो शुल्क लिया जाता है, वह शुल्क सरकारी स्कूलों में मुफ्त दिया जाता है। अभिभावक सरकार को अत्यधिक शुल्क के बारे में लगातार शिकायत करते रहे हैं, जिसके बाद शिक्षा मंत्री ने इस मामले की जांच करने का वादा किया है और ऐसा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए भी कहा है। मंत्री ने वर्तमान में महामारी की स्थितियों पर विचार करने वाले स्कूलों के पाठ्यक्रम को कम करने की बोर्ड की सोच के बारे में भी बताया है। उन्होंने कहा कि राज्य में एक समिति का गठन किया गया है जो छात्रों के सिलेबस को 20- 30 प्रतिशत तक कम करेगी।

शिक्षा मंत्री ने बताया कि वे राज्य में डॉक्टरों के साथ लगातार बातचीत कर रहे थे, जिन्होंने सलाह दी है कि स्कूल को कुछ समय के लिए बंद रखा जाए क्योंकि अब फिर से पढ़ाई करने से वहां पढ़ने वाले छात्रों के लिए स्वास्थ्य को खतरा हो सकता है।

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