Haryana Cabinet, Biography And Political Career Of Bjp Leader Anil Vij – हरियाणा कैबिनेटः अनिल विज फिर बने कैबिनेट मंत्री, छह बार जीत चुके हैं चुनाव


न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 15 Nov 2019 11:50 AM IST

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अनिल विज हरियाणा की भाजपा-जजपा सरकार के वरिष्ठ नेता हैं। वहीं पिछले मनोहर कैबिनेट के जो दो मंत्री इस बार चुनाव जीते हैं उनमें से  एक हैं। अनिल विज हरियाणा की अंबाला कैंट विधानसभा से छठी बार विधायक हैं। पिछले सरकार में वे स्वास्थ्य मंत्री रह चुके हैं।

15 मार्च 1953 को जन्मे अनिल विज की पहचान एक तेज तर्रार नेता के रूप में है। अनिल विज ने राजनीति की शुरूआत छात्र संगठन एबीवीपी से की है। अंबाला कैंट स्थित एसडी कॉलेज में पढ़ाई के दौरान एबीवीपी में शामिल हुए। 1970 में अनिल विज को एबीवीपी महासचिव बनाया गया।

एसबीआई की नौकरी छोड़ बने विधायक
साल 1990 में सुषमा स्वराज राज्यसभा की सदस्य चुनीं गईं। इसके बाद अंबाला कैंट विधानसभा सीट खाली हो गई। इस सीट पर उपचुनाव होना था। अनिल विज ने चुनाव लड़ने की पेशकश की। इसके लिए उन्होंने एसबीआई की नौकरी भी छोड़ दी। किस्मत ने साथ दिया और पहली बार विधायक बन हरियाणा विधानसभा पहुंचे। 1991 में अनिल विज को भारतीय जनता युवा मोर्चा का प्रदेशाध्यक्ष बनाया गया। 

दो बार निर्दलीय पहुंचे विधानसभा
अनिल विज दो बार हरियाणा विधानसभा निर्दलीय के तौर पर भी जा चुके हैं। 1996 और 2000 में अनिल विज ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा और दोनों बार जीत दर्ज की। हालांकि 2005 में विज को हार का सामना करना पड़ा।

2009 में एक बार फिर अनिल विज भाजपा प्रत्याशी बन अंबाला कैंट से मैदान में उतरे और फतह कर दिखाया। 2014 और 2019 में विज फिर एक बार इसी सीट से चुनाव जीतकर हरियाणा विधानसभा पहुंचे हैं। हरियाणा की मनोहर सरकार में इस वक्त अनिल विज वरिष्ठ नेता हैं और लंबी राजनीति का अनुभव है। 

अनिल विज का प्रोफाइल एक नजर में-

  • अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से एसडी कालेज में पढ़ते हुए छात्र राजनीति की शुरुआत की।
  • 1970 में पहली बार एबीवीपी के महासचिव बने।
  • 1974 में स्टेट बैंक आफ इंडिया में नौकरी ज्वॉइन की।
  • 1990 में विधायक सुषमा स्वराज को यहां से राज्यसभा में मनोनीत करने के कारण यह सीट खाली हुई।
  • 1991 में नौकरी से इस्तीफा देकर पहला चुनाव भाजपा की टिकट से लड़ते हुए जीत दर्ज कराई।
  • जीतने के बाद भारतीय जनता युवा मोर्चा का स्टेट प्रधान बनाया गया।
  • पार्टी से संबंध खराब होने के बाद 1996 फिर 2000 में आजाद उम्मीदवार खड़े हुए और जीत दर्ज की।
  • 2005 में कांग्रेस के देवेंद्र बंसल से थोड़े से मार्जन से हार गए।
  • 2009 में दोबारा भाजपा ज्वाइन की और छावनी विधानसभा सीट से चौथी बार विधायक बने। 
  • 2014 में भाजपा ने इन पर फिर भरोसा दिखाया और विज यहां से जीतकर स्वास्थ्य मंत्री बने।
  • 2019 में छठी जीत के साथ उनका कद भी बढ़ गया और गृह, स्वास्थ्य के साथ कई मंत्रालय विज को दे दिए गए।
अनिल विज हरियाणा की भाजपा-जजपा सरकार के वरिष्ठ नेता हैं। वहीं पिछले मनोहर कैबिनेट के जो दो मंत्री इस बार चुनाव जीते हैं उनमें से  एक हैं। अनिल विज हरियाणा की अंबाला कैंट विधानसभा से छठी बार विधायक हैं। पिछले सरकार में वे स्वास्थ्य मंत्री रह चुके हैं।

15 मार्च 1953 को जन्मे अनिल विज की पहचान एक तेज तर्रार नेता के रूप में है। अनिल विज ने राजनीति की शुरूआत छात्र संगठन एबीवीपी से की है। अंबाला कैंट स्थित एसडी कॉलेज में पढ़ाई के दौरान एबीवीपी में शामिल हुए। 1970 में अनिल विज को एबीवीपी महासचिव बनाया गया।

एसबीआई की नौकरी छोड़ बने विधायक
साल 1990 में सुषमा स्वराज राज्यसभा की सदस्य चुनीं गईं। इसके बाद अंबाला कैंट विधानसभा सीट खाली हो गई। इस सीट पर उपचुनाव होना था। अनिल विज ने चुनाव लड़ने की पेशकश की। इसके लिए उन्होंने एसबीआई की नौकरी भी छोड़ दी। किस्मत ने साथ दिया और पहली बार विधायक बन हरियाणा विधानसभा पहुंचे। 1991 में अनिल विज को भारतीय जनता युवा मोर्चा का प्रदेशाध्यक्ष बनाया गया। 

दो बार निर्दलीय पहुंचे विधानसभा
अनिल विज दो बार हरियाणा विधानसभा निर्दलीय के तौर पर भी जा चुके हैं। 1996 और 2000 में अनिल विज ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा और दोनों बार जीत दर्ज की। हालांकि 2005 में विज को हार का सामना करना पड़ा।

2009 में एक बार फिर अनिल विज भाजपा प्रत्याशी बन अंबाला कैंट से मैदान में उतरे और फतह कर दिखाया। 2014 और 2019 में विज फिर एक बार इसी सीट से चुनाव जीतकर हरियाणा विधानसभा पहुंचे हैं। हरियाणा की मनोहर सरकार में इस वक्त अनिल विज वरिष्ठ नेता हैं और लंबी राजनीति का अनुभव है। 

अनिल विज का प्रोफाइल एक नजर में-

  • अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से एसडी कालेज में पढ़ते हुए छात्र राजनीति की शुरुआत की।
  • 1970 में पहली बार एबीवीपी के महासचिव बने।
  • 1974 में स्टेट बैंक आफ इंडिया में नौकरी ज्वॉइन की।
  • 1990 में विधायक सुषमा स्वराज को यहां से राज्यसभा में मनोनीत करने के कारण यह सीट खाली हुई।
  • 1991 में नौकरी से इस्तीफा देकर पहला चुनाव भाजपा की टिकट से लड़ते हुए जीत दर्ज कराई।
  • जीतने के बाद भारतीय जनता युवा मोर्चा का स्टेट प्रधान बनाया गया।
  • पार्टी से संबंध खराब होने के बाद 1996 फिर 2000 में आजाद उम्मीदवार खड़े हुए और जीत दर्ज की।
  • 2005 में कांग्रेस के देवेंद्र बंसल से थोड़े से मार्जन से हार गए।
  • 2009 में दोबारा भाजपा ज्वाइन की और छावनी विधानसभा सीट से चौथी बार विधायक बने। 
  • 2014 में भाजपा ने इन पर फिर भरोसा दिखाया और विज यहां से जीतकर स्वास्थ्य मंत्री बने।
  • 2019 में छठी जीत के साथ उनका कद भी बढ़ गया और गृह, स्वास्थ्य के साथ कई मंत्रालय विज को दे दिए गए।





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