ISRO 50 YRS: इसरो के 50 साल: बैलगाड़ी से चंद्रयान-2, पढ़िए ISRO के उड़ान की कहानी – indian space research organisation completes 50 years achieved many milestone such as chandrayaan mission mars


टाइम्स न्यूज नेटवर्क | Updated:

हाइलाइट्स

  • 2019 इसरो का गोल्डन जुबली साल, संस्थापक विक्रम साराभाई का जन्मशती वर्ष भी है
  • इसरो की प्राथमिकता हमेशा अंतरिक्ष विज्ञान के जरिए आम नागरिकों का जीवन बेहत बनाना रही
  • इसरो के चेयरमैन के सिवन ने कहा, ‘हम आज भी विक्रम साराभाई के प्रेरणा वाक्य को लेकर चल रहे’
  • 50 साल में इसरो ने लंबा सफर तय किया, अंतरिक्ष विज्ञान में आज भारत विश्व के साथ चल रहा है

चेतन कुमार, नई दिल्ली

अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों पर अब पूरे विश्व की नजर है। कल 15 अगस्त को जब भारत अपना 73वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा था, उसी दिन इसरो के स्थापना के भी 50 वर्ष पूरे हुए। 5 दशक की इस यात्रा में इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। भारत की आजादी के बाद स्थापित इसरो ने भारत की ही तरह विकास की लंबी यात्रा तय की है। इसरो का पहला प्रॉजेक्ट सैटलाइट टेलिकम्युनिकेशन एक्सपेरिमेंट प्रॉजेक्ट (स्टेप) था जिसने भारत के गांवों तक टीवी की पहुंच सुनिश्चित की। आज मछुआरों के लिए इसरो रीयल टाइम सैटलाइट का प्रयोग कर रहा है। आइए नजर डालते हैं इसरो की गौरवशाली विकास यात्रा पर…

यह साल इसरो के लिए बहुत सारी उपलब्धियों का रहा

इस साल इसरो की महत्वपूर्ण उपलब्धि रही मिशन चंद्रयान-2 का सफलतापूर्वक लॉन्च। मिशन चंद्रयान-2 के सफल लॉन्च पर पूरे देश की ही नहीं विश्व की नजर है। यह साल इस लिहाज से भी खास है क्योंकि यह इसरो की स्थापना का 50वां साल है। इसरो इस साल अपना गोल्डन जुबली इयर मना रहा है और यह हरेक भारतवासी के लिए महान उपलब्धि है। यह साल इसरो के संस्थापक और भारत में अंतरिक्ष विज्ञान के जनक माने जानेवाले विक्रम साराभाई की जन्मशती का भी वर्ष है।

NBT

इसरो की प्राथमिकता भारतीयों के जीवन को बेहतर बनाना रही

इसरो की उपलब्धियां इस लिहाज से भी अलग है कि भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की प्राथमिकता हमेशा अंतरिक्ष विज्ञान का प्रयोग आम आदमी के जीवन में सुधार लाने की रही है। जब भारत के अंतरिक्ष प्रयोगों की स्थापना का दौर था, उस वक्त भी अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की उपलब्धियां स्पष्ट थीं। इसरो के कार्यक्रमों का फोकस शुरुआत में पृथ्वी का गहन अध्ययन और संचार सुविधाओं में सुधार था। विक्रम साराभाई ने अपने एक चर्चित भाषण में कहा था, ‘हम नागरिकों को चांद पर भेजने का सपना नहीं देख रहे हैं और न ही विभिन्न ग्रहों का अध्ययन हमारा ध्येय है।’ यह भारतीय वैज्ञानिकों के महत्वाकांक्षी नहीं होने या निराशावादी होने की निशानी नहीं है। यह वैज्ञानिकों की भारत की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तय किए लक्ष्य थे।

NBT

ISRO की उपलब्धियों के कई अध्याय

के. सिवन ने भी दोहराया साराभाई का आदर्श

स्पेस एजेंसी के वर्तमान चेयरमैन के. सिवन ने भी साराभाई के आदर्श को ही अपनाने की बात कही। उन्होंने कहा, ‘साराभाई का विजन था कि अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीक का प्रयोग आम नागरिकों के हित में अधिक होना चाहिए। यह आज भी इसरो के लिए प्रेरणा वाक्य की तरह है। हमारे सभी प्रोग्राम इस उद्देश्य को ध्यान में रखकर ही बनते हैं और जिसके कुछ बेहतरीन नतीजे भी नजर आ रहे हैं।’

NBT

चंद्रयान 2 की उड़ान

आज इसरो दूसरे देशों की भी कर रहा है मदद

एक वक्त ऐसा था कि इसरो अपनी ज्यादातर जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर था। अपने सैटलाइट के निर्माण और उनके लॉन्च के लिए इसरो की निर्भरता अन्य देशों पर थी। हालांकि, इस दिशा में इसरो ने अब बहुत तरक्की की है और अब भारत अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में विश्व के कई देशों की मदद कर रहा है। 15 फरवरी 2017 को इसरो ने 104 सैटलाइट एक साथ लॉन्च किया जो आज तक विश्व रेकॉर्ड है। इनमें से ज्यादातर सैटलाइट दूसरे देशों के थे।

इसरो की कर्मशल इकाई भी कर रही अच्छा प्रदर्शन

पिछले 3 साल में इसरो ने 239 कर्मशल सैटलाइट लॉन्च किए हैं जिससे इसरो की कमर्शल इकाई एंट्रिक्स कॉर्पोरेशन ने करीब 6,289 रेवेन्यू कमाया है। आज अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में इसरो विश्व के अग्रणी संस्थानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहा है। नासा के साथ हाल ही में इसरो ने सिंथेटिर अपरचर रडार (निसार) पर मिलकर काम करने के लिए करार किया है। इसमें इसरो और नासा बराबर की सहयोगी हैं। इतना ही नहीं जापान के साथ चंद्रमा और मंगल के मिशन में भी इसरो और नासा मिलकर काम करनेवाले हैं।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *