Jee-neet Exam Date Has Been Announced But Student Faceing More Problems – जेईई-नीट परीक्षा के तारीख की घोषणा तो हो गई पर छात्रों की चिंता नहीं हो रहीं कम



एजुकेशन डेस्क,अमर उजाला
Updated Thu, 23 Jul 2020 12:08 PM IST

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जेईई मेन और नीट परीक्षा के तारीखों की घोषणा हो चुकी है, पर छात्रों की चिंता कम नहीं हो रही हैं। विद्यार्थियों को फिर से इन प्रवेश परीक्षाओं के स्थगित होने का डर सता रहा है। बोर्ड के नतीजे घोषित होते ही विद्यार्थियों को कुछ सूकूं जरूर मिला था, लेकिन कॉलेजों में ऑनलाइन दाखिले एवं इतने लंबे वक्त तक इन प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए ध्यान केंद्रित करने की वजह से विद्यार्थियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

यह पहली बार हुआ है कि जब वैश्विक कोरोना महामारी की वजह से बोर्ड का रिजल्ट देरी से आया है और जेईई एवं नीट प्रवेश परीक्षाएं भी अन्य सालों के मुकाबले देरी से हो रही हैं। ऐसे में विद्यार्थियों के सामने कई चुनौतियां एक साथ खड़ी हो गई हैं। उनको भविष्य का डर, तो सता ही रहा है इसके साथ ही उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है।

इसे भी पढ़ें-राजस्थान: बारहवीं में 99 फीसदी से ज्यादा नंबर लाया मजदूर का बेटा, आईएएस बनने का है ख्वाब

आर्थिक रूप से कमजोर और वित्तीय परेशानी से गुजर रहे छात्रों को घर पर रहने के दौरान और मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे छात्र घर पर दिन-ब-दिन चिंतित हो रहे हैं। हालांकि, इन प्रवेश परीक्षाओं संबंधी दिक्कतों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी हुए हैं, जिनमें प्रश्नों की संख्या में पिछले साल के मुकाबले 50 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। सरकार ने विद्यार्थियों के काउंसलिंग के भी उपाय किए हैं। फिर भी छात्रों के सामने कई दिक्कतें आ रही हैं। छात्रों का कहना है कि इस मुश्किल दौर में विद्यार्थियों को शिक्षाविदों की नहीं, बल्कि भावनात्मक रूप से मजबूत करने वाली चीजों की जरूरत है। परीक्षाओं के स्थगित होने से विद्यार्थियों को तैयारी में परेशानी हो रही है और भविष्य की चिंता बढ़ रही है। परीक्षा केंद्रों में बदलाव से भी विद्यार्थियों के सामने नई चुनौती खड़ी हो रही हैं, क्योंकि इस वक्त ज्यादातर विद्यार्थी अपने-अपने गृह नगरों में हैं। छात्रों का कहना है कि इस पूरे बदलाव ने स्वास्थ्य के साथ ही पूरे साल पर असर डाला है। इस पूरे दौर ने छात्रों के लिए कॉलेज में दाखिले के चयन को भी मुश्किल बना दिया है। काउंसलरों के पास सबसे ज्यादा जो सवाल आ रहे हैं उनमें ‘मुझे और कितना इंतजार करना होगा।’ इस बारे में हैं।

इसे भी पढ़ें-नीट व जेईई प्रवेश परीक्षा- कैसे एक अंक का अंतर प्रभावित करता है आपकी रैंक

विद्यामंदिर क्लासेस के निदेशक शिक्षाविद सौरभ कुमार का कहना है कि यह विलंब छात्रों के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी माहौल बनाएगा। कट-ऑफ अधिक होने की उम्मीद है। उनका कहना है कि जो छात्र जेईई मेन में जनवरी के प्रयास के लिए उपस्थित हुए थे और 92+ स्कोर लाए थे, वे जेईई मेन के बजाय जेईई एडवांस की तैयारी कर रहे हैं। छात्र कॉलेज की शिक्षा के लिए कम समय पाने से भी चिंतित हैं। हालांकि, शिक्षाविदों का कहना है कि अगर छात्र प्रैक्टिस का मंत्र का पालन करें तो जरूर सफल होंगे। इससे ही उनकी रैंकिंग बढ़ेगी।

जेईई मेन और नीट परीक्षा के तारीखों की घोषणा हो चुकी है, पर छात्रों की चिंता कम नहीं हो रही हैं। विद्यार्थियों को फिर से इन प्रवेश परीक्षाओं के स्थगित होने का डर सता रहा है। बोर्ड के नतीजे घोषित होते ही विद्यार्थियों को कुछ सूकूं जरूर मिला था, लेकिन कॉलेजों में ऑनलाइन दाखिले एवं इतने लंबे वक्त तक इन प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए ध्यान केंद्रित करने की वजह से विद्यार्थियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

यह पहली बार हुआ है कि जब वैश्विक कोरोना महामारी की वजह से बोर्ड का रिजल्ट देरी से आया है और जेईई एवं नीट प्रवेश परीक्षाएं भी अन्य सालों के मुकाबले देरी से हो रही हैं। ऐसे में विद्यार्थियों के सामने कई चुनौतियां एक साथ खड़ी हो गई हैं। उनको भविष्य का डर, तो सता ही रहा है इसके साथ ही उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है।

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आर्थिक रूप से कमजोर और वित्तीय परेशानी से गुजर रहे छात्रों को घर पर रहने के दौरान और मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे छात्र घर पर दिन-ब-दिन चिंतित हो रहे हैं। हालांकि, इन प्रवेश परीक्षाओं संबंधी दिक्कतों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी हुए हैं, जिनमें प्रश्नों की संख्या में पिछले साल के मुकाबले 50 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। सरकार ने विद्यार्थियों के काउंसलिंग के भी उपाय किए हैं। फिर भी छात्रों के सामने कई दिक्कतें आ रही हैं। छात्रों का कहना है कि इस मुश्किल दौर में विद्यार्थियों को शिक्षाविदों की नहीं, बल्कि भावनात्मक रूप से मजबूत करने वाली चीजों की जरूरत है। परीक्षाओं के स्थगित होने से विद्यार्थियों को तैयारी में परेशानी हो रही है और भविष्य की चिंता बढ़ रही है। परीक्षा केंद्रों में बदलाव से भी विद्यार्थियों के सामने नई चुनौती खड़ी हो रही हैं, क्योंकि इस वक्त ज्यादातर विद्यार्थी अपने-अपने गृह नगरों में हैं। छात्रों का कहना है कि इस पूरे बदलाव ने स्वास्थ्य के साथ ही पूरे साल पर असर डाला है। इस पूरे दौर ने छात्रों के लिए कॉलेज में दाखिले के चयन को भी मुश्किल बना दिया है। काउंसलरों के पास सबसे ज्यादा जो सवाल आ रहे हैं उनमें ‘मुझे और कितना इंतजार करना होगा।’ इस बारे में हैं।

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विद्यामंदिर क्लासेस के निदेशक शिक्षाविद सौरभ कुमार का कहना है कि यह विलंब छात्रों के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी माहौल बनाएगा। कट-ऑफ अधिक होने की उम्मीद है। उनका कहना है कि जो छात्र जेईई मेन में जनवरी के प्रयास के लिए उपस्थित हुए थे और 92+ स्कोर लाए थे, वे जेईई मेन के बजाय जेईई एडवांस की तैयारी कर रहे हैं। छात्र कॉलेज की शिक्षा के लिए कम समय पाने से भी चिंतित हैं। हालांकि, शिक्षाविदों का कहना है कि अगर छात्र प्रैक्टिस का मंत्र का पालन करें तो जरूर सफल होंगे। इससे ही उनकी रैंकिंग बढ़ेगी।



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