Kargil War Hero ‘mig-21’ Is The Pride Of Vip City Mohali



न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली (पंजाब)
Updated Sun, 26 Jul 2020 12:41 PM IST

मोहाली स्थित महाराजा रणजीत सिंह इंस्टीट्यूट में स्थापित मिग-21।
– फोटो : अमर उजाला

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹249 + Free Coupon worth ₹200

ख़बर सुनें

21 साल पहले दुनिया के सबसे ऊंचे रणक्षेत्र में दुश्मन के छक्के छुड़ाने वाली भारतीय वायुसेना की 17-स्क्वाड्रन गोल्डन ऐरो का फाइटर प्लेन ‘मिग-21’ (त्रिशूल) मोहाली की शान है। संभव है मोहाली के अधिकांश लोग भी उन्हें मिले हुए इस गौरव से परिचित न हों। जी हां, वीआईपी सिटी के महाराजा रणजीत सिंह आर्म्ड फोर्सेज प्रिपेटरी इंस्टीट्यूट के परिसर में सैन्य अधिकारी बनने का सपना संजोए युवाओं को स्वर्णिम इतिहास से परिचित करवाता यह विमान कारगिल वॉर का हीरो है।

बता देें कि कारगिल युद्ध के दौरान बठिंडा में तैनात वायुसेना की 17-स्क्वाड्रन गोल्डन ऐरो को दुश्मन से लोहा लेने का जिम्मा सौंपा गया था। वायुसेना के 300 जांबाज पायलट 20 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ान भरते थे। कारगिल युद्ध 18 हजार फीट की ऊंचाई पर लड़ा गया था। ‘मिग-21’ विमान में 20 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ान भरना पायलट के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। विमान उसके लिए ताबूत बन सकता है। इसके बावजूद भारतीय वायुसेना के जांबाज पायलटों ने इसकी परवाह न करते हुए दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब दिया था।

यह भी पढ़ें- जिन पर हुआ कोरोना की स्वदेशी वैक्सीन का ट्रायल, पढ़ें- उनका पूरा इंटरव्यू, सिर्फ अमर उजाला पर

यहां बता दें कि पाकिस्तानी वायुसेना ने इसी ऊंचाई पर लड़ने से साफ इनकार कर दिया था। इस ऐतिहासिक जंग के स्वर्णिम इतिहास का हिस्सा रहे एक ‘मिग-21’ लड़ाकू विमान को मोहाली लाया गया था। जो इन दिनों राज्य के इकलौते आर्म्ड फोर्सेज प्रिपेटरी इंस्टीट्यूट के परिसर में शोभायमान है। आईएमए यानी इंडियन मिलिटरी अकादमी के डायरेक्टर रहे मेजर जनरल बीएस ग्रेवाल को रिटायरमेंट के बाद एएफपीआई के डायरेक्टर की जिम्मेदारी सौंपी गई।

इस पर मेजर जनरल ग्रेवाल ने तत्कालीन एयर चीफ मार्शल से कारगिल युद्ध में हिस्सा लेने वाले एक मिग विमान को इंस्टीट्यूट के परिसर में स्थापित करने का प्रस्ताव भेजा। इससे भारतीय सेनाओं में अधिकारी के तौर पर शामिल होने का सपना संजो कर आने वाले पंजाब के युवाओं को सेना के गौरवशाली स्वर्णिम इतिहास से प्रोत्साहन मिल सके। एयर चीफ मार्शल ने उनके प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए बठिंडा में तैनात ‘मिग-21’ को मोहाली भेजने के आदेश दिए। इसके बाद मई, 2012 में यह भारतीय वायुसेना का यह लड़ाकू विमान मोहाली लाया गया और इसे एएफपीआई परिसर में स्थापित किया गया।

मोहाली लाए गए कारगिल वॉर हीरो से जुड़ी जानकारी

  • कारगिल वॉर के हीरो इस ‘मिग-21’ का भारतीय नाम त्रिशूल है
  • यह विमान 2125 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भर सकता है
  • कारगिल युद्ध से पहले यह विमान 1971 और 1965 के युद्ध में दुश्मन से लोहा ले चुका है
  • इस लड़ाकू विमान में 23 एमएम गन लगी हैं
  • यह विमान हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल दागने में सक्षम है
  • पांच-पांच सौ किलो के दो भारी भरकम बम ले जाने और दागने की क्षमता रखता है
  • विमान का वजन 8000 किलो है
21 साल पहले दुनिया के सबसे ऊंचे रणक्षेत्र में दुश्मन के छक्के छुड़ाने वाली भारतीय वायुसेना की 17-स्क्वाड्रन गोल्डन ऐरो का फाइटर प्लेन ‘मिग-21’ (त्रिशूल) मोहाली की शान है। संभव है मोहाली के अधिकांश लोग भी उन्हें मिले हुए इस गौरव से परिचित न हों। जी हां, वीआईपी सिटी के महाराजा रणजीत सिंह आर्म्ड फोर्सेज प्रिपेटरी इंस्टीट्यूट के परिसर में सैन्य अधिकारी बनने का सपना संजोए युवाओं को स्वर्णिम इतिहास से परिचित करवाता यह विमान कारगिल वॉर का हीरो है।

बता देें कि कारगिल युद्ध के दौरान बठिंडा में तैनात वायुसेना की 17-स्क्वाड्रन गोल्डन ऐरो को दुश्मन से लोहा लेने का जिम्मा सौंपा गया था। वायुसेना के 300 जांबाज पायलट 20 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ान भरते थे। कारगिल युद्ध 18 हजार फीट की ऊंचाई पर लड़ा गया था। ‘मिग-21’ विमान में 20 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ान भरना पायलट के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। विमान उसके लिए ताबूत बन सकता है। इसके बावजूद भारतीय वायुसेना के जांबाज पायलटों ने इसकी परवाह न करते हुए दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब दिया था।

यह भी पढ़ें- जिन पर हुआ कोरोना की स्वदेशी वैक्सीन का ट्रायल, पढ़ें- उनका पूरा इंटरव्यू, सिर्फ अमर उजाला पर



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *