Know About Important Banking Terms Related To Rbi That Affect Your Lives – जानें रेपो रेट व रिवर्स रेपो रेट सहित अन्य बैंकिंग टर्म्स के अर्थ, जिनका आप पर होता है असर



बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 24 Jul 2020 12:45 PM IST

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आपने आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की समीक्षा बैठक के दौरान रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट और सीआरआर जैसे शब्द जरूर सुने होंगे। पर क्या आप इन शब्दों के मतलब जानते हैं? आज हम आपको मॉनिटरी पॉलिसी से जुड़ी जरूरी बातें और इन शब्दों का मतलब और मायने बता रहे हैं। इसके लिए आगे की स्लाइड्स देखें।

रेपो रेट
रेपो रेट वह दर होती है जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है। बैंक इस कर्ज से ग्राहकों को लोन देते हैं। रेपो रेट कम होने का मतलब है कि बैंक से मिलने वाले कई तरह के कर्ज, जैसे होम लोन, कार लोग अब सस्ते हो जाएंगे। हालांकि बैंक इसे कब तक और कितना कम करेंगे ये उन पर निर्भर करता है। इसे भारतीय रिजर्व बैंक हर तिमाही के आधार पर तय करता है।

रिवर्स रेपो रेट
यह रेपो रेट से उलट होता है। यह वह दर होती है जिस पर बैंकों को उनकी ओर से आरबीआई में जमा राशि पर ब्याज मिलता है। रिवर्स रेपो रेट बाजार में नकदी की तरलता को नियंत्रित करने में काम आती है। बाजार में जब भी बहुत ज्यादा नकदी दिखाई देती है, आरबीआई रिवर्स रेपो रेट बढ़ा देता है, ताकि बैंक ज्यादा ब्याज कमाने के लिए अपनी रकम उसके पास जमा करा दें।

सीआरआर
देश में लागू बैंकिंग नियमों के तहत हर बैंक को अपनी कुल नकदी का एक निश्चित हिस्सा रिजर्व बैंक के पास रखना होता है। इसे ही कैश रिजर्व रेशियो (CRR) या नकद आरक्षित अनुपात कहते हैं।

एसएलआर
जिस दर पर बैंक अपना पैसा सरकार के पास रखते हैं, उसे SLR कहते हैं। नकदी की तरलता को नियंत्रित करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। कमर्शियल बैंकों को एक खास रकम जमा करानी होती है जिसका इस्तेमाल किसी इमरजेंसी लेन-देन को पूरा करने में किया जाता है।

एमएसएफ
आरबीआई ने पहली बार वित्त वर्ष 2011-12 में वार्षिक आर्थिक नीति समीक्षा में MSF का जिक्र किया था। यह 9 मई 2011 को लागू हुआ। इसमें सभी शेड्यूल कमर्शियल बैंक एक रात के लिए अपने कुल जमा का 1% तक लोन ले सकते हैं।

आपने आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की समीक्षा बैठक के दौरान रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट और सीआरआर जैसे शब्द जरूर सुने होंगे। पर क्या आप इन शब्दों के मतलब जानते हैं? आज हम आपको मॉनिटरी पॉलिसी से जुड़ी जरूरी बातें और इन शब्दों का मतलब और मायने बता रहे हैं। इसके लिए आगे की स्लाइड्स देखें।

रेपो रेट

रेपो रेट वह दर होती है जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है। बैंक इस कर्ज से ग्राहकों को लोन देते हैं। रेपो रेट कम होने का मतलब है कि बैंक से मिलने वाले कई तरह के कर्ज, जैसे होम लोन, कार लोग अब सस्ते हो जाएंगे। हालांकि बैंक इसे कब तक और कितना कम करेंगे ये उन पर निर्भर करता है। इसे भारतीय रिजर्व बैंक हर तिमाही के आधार पर तय करता है।



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