Mamta Banerjee Says Jee Main Exam Should Be Conducted In All Regional Languages Not Only In Gujarati – केंद्र सरकार पर भड़कीं ममता, कहा- जेईई परीक्षा केवल गुजराती में ही क्यों?


एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Updated Thu, 07 Nov 2019 03:30 AM IST

ममता बनर्जी (फाइल फोटो)
– फोटो : पीटीआई

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जेईई मेन के लिए गुजराती को वैकल्पिक विषय के रूप में शामिल करने पर विवाद छिड़ गया है। गैर हिंदी भाषी राज्यों के नेताओं ने इस फैसले पर आपत्ति जताई है। गौरतलब है कि अब तक यह परीक्षा हिंदी और अंग्रेजी माध्यम में होती रही है।

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने अगले साल होने वाली जेईई मेन के लिए हिंदी व अंग्रेजी के साथ गुजराती को भी रखा है। इस पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आपत्ति जताई है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि मुझे गुजराती भाषा पसंद है, लेकिन अन्य क्षेत्रीय भाषाओं को नजरअंदाज क्यों किया गया। यदि जेईई मेन की परीक्षा गुजराती में हो रही है तो फिर बांग्ला समेत अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में भी होनी चाहिए।

उधर भाजपा के राज्यसभा सांसद स्वपन दासगुप्ता ने भी क्षेत्रीय भाषा में केवल गुजराती को शामिल करने का विरोध किया है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि सभी मुख्य क्षेत्रीय भाषाओं को प्राथमिकता देना चाहिए। खासकर तमिल और बांग्ला को जरूर शामिल किया जाना चाहिए।

किसी भाषा को शामिल नहीं किया : एनटीए

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी प्रबंधन का कहना है कि उन्होंने किसी भाषा को जोड़ा या हटाया नहीं है। 2019 में जब एनटीए को जेईई मेन कराने की जिम्मेदारी मिली, तब हिंदी व अंग्रेजी के साथ गुजराती शामिल थी। इससे पहले परीक्षा सीबीएसई बोर्ड आयोजित करता था।

गुजराती 2013 से जेईई मेन में शामिल : सीबीएसई

वहीं सीबीएसई प्रबंधन का कहना है कि संयुक्त प्रवेश परीक्षा में गुजराती भाषा 2013 में जोड़ी गयी थी। इसलिए गुजराती कई वर्षों से हिंदी व अंग्रेजी के साथ वैकल्पिक भाषा के रूप में शामिल है।

जेईई मेन के लिए गुजराती को वैकल्पिक विषय के रूप में शामिल करने पर विवाद छिड़ गया है। गैर हिंदी भाषी राज्यों के नेताओं ने इस फैसले पर आपत्ति जताई है। गौरतलब है कि अब तक यह परीक्षा हिंदी और अंग्रेजी माध्यम में होती रही है।

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने अगले साल होने वाली जेईई मेन के लिए हिंदी व अंग्रेजी के साथ गुजराती को भी रखा है। इस पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आपत्ति जताई है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि मुझे गुजराती भाषा पसंद है, लेकिन अन्य क्षेत्रीय भाषाओं को नजरअंदाज क्यों किया गया। यदि जेईई मेन की परीक्षा गुजराती में हो रही है तो फिर बांग्ला समेत अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में भी होनी चाहिए।

उधर भाजपा के राज्यसभा सांसद स्वपन दासगुप्ता ने भी क्षेत्रीय भाषा में केवल गुजराती को शामिल करने का विरोध किया है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि सभी मुख्य क्षेत्रीय भाषाओं को प्राथमिकता देना चाहिए। खासकर तमिल और बांग्ला को जरूर शामिल किया जाना चाहिए।

किसी भाषा को शामिल नहीं किया : एनटीए

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी प्रबंधन का कहना है कि उन्होंने किसी भाषा को जोड़ा या हटाया नहीं है। 2019 में जब एनटीए को जेईई मेन कराने की जिम्मेदारी मिली, तब हिंदी व अंग्रेजी के साथ गुजराती शामिल थी। इससे पहले परीक्षा सीबीएसई बोर्ड आयोजित करता था।

गुजराती 2013 से जेईई मेन में शामिल : सीबीएसई

वहीं सीबीएसई प्रबंधन का कहना है कि संयुक्त प्रवेश परीक्षा में गुजराती भाषा 2013 में जोड़ी गयी थी। इसलिए गुजराती कई वर्षों से हिंदी व अंग्रेजी के साथ वैकल्पिक भाषा के रूप में शामिल है।





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