Pathankot Became Pollution-free District For The Fourth Time Due To Non-burning Of Straw – पराली न जलाने पर पठानकोट चौथी बार बना प्रदूषण रहित जिला


पराली न जलाकर पठानकोट के किसान सूबे भर के किसानों के लिए मिसाल बन रहे हैं। सरकार ने लगातार चौथे साल पठानकोट को प्रदूषण रहित जिले की उपाधि से नवाजा है। डीसी रामबीर ने वीरवार को मिनी सचिवालय में जिले के 570 किसानों को प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया। 

पठानकोट में 2017 में 12 और 2018 के दौरान पराली जलाने के केवल 9 मामले सामने आए थे, इनमें अधिकतर सरहद पार पाकिस्तान और कुछेक कचरे में लाग लगने के थे। इस बार पराली जलने के केवल 2 मामले सामने आए। जिन गांवों में आग लगाई गई, उन किसानों पर मामले दर्ज किए गए। जबकि एक मामले में सरपंच को ही सस्पेंड कर दिया गया था।

पराली बेच किसानों ने कमाए 211 करोड़
पठानकोट में 27 हजार हेक्टेयर में धान की काश्त की जाती है। जिससे लगभग 80 हजार मीट्रिक टन धान की पैदावार के साथ 1.5 लाख मीट्रिक टन पराली भी पैदा होती है। पठानकोट के कृषि विभाग ने बड़े स्तर पर सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया, स्कूलों/कॉलेजों में जागरूकता कैंप, गांवों में पब्लिक एड्रेस सिस्टम से सरकार का संदेश किसानों तक पहुंचाया। 

डीसी ने बताया कि प्रशासन का मंतव्य जीरो बर्निंग था, लेकिन दो किसानों की बदौलत यह संभव नहीं हो पाया। जिन किसानों ने आग लगाई, उन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की गई। उन्होंने बताया कि पठानकोट के किसानों ने जलाने के बजाय पराली गुर्जर भाईचारे को बेची। 4200 रुपये प्रति हेक्टेयर के हिसाब से पराली बेच किसानों ने 112 करोड़ 8 लाख 75 हजार रुपये भी कमाए। उक्त पैसों को किसान गेहूं की बिजाई पर खर्च करेंगे। 

पराली का धुआं खतरनाक, बीमारियों के लिए जिम्मेदार
कृषि विशेषज्ञ डॉ. अमरीक सिंह बताते हैं कि एक टन पराली जलाने से 400 किलो जैविक कार्बन, 5.5 किलो नाइट्रोजन, 2.3 किलो फास्फोरस, 25 किलो पोटाश, 1.2 किलो सल्फर और मिट्टी के लघु जीवों का नुकसान होता है। इसके अलावा कई जहरीली गैसें पैदा होती हैं जिसके चलते सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन और चमड़ी रोगों का खतरा बढ़ जाता है। 

उन्होंने बताया कि पराली को बेचने के अलावा अन्य कई जगह पर इस्तेमाल किया जा सकता है। बताया कि पशुओं के चारे के अलावा पराली को बिजली पैदा करने, पशुओं की बैडिंग, खुंब पैदा करने और गत्ता मिलों में इस्तेमाल किया जाता है। 

पठानकोट में 10 मशीनरी बैंक स्थापित 
डीसी ने बताया कि पराली के निपटारे के लिए कुछ मशीनें जिनमें पीएयू हैपीसीडर, मल्चर, चॉपर, पराली को काटने और बिछाने वाली मशीनें ईजाद की जा चुकी हैं। उक्त मशीनें महंगी थीं, जिसके चलते अकेला किसान इन्हें नहीं खरीद सकता था, इसलिए किसानों के समूह बनाए जाने चाहिए। प्रशासन ने जिले में 10 मशीनरी बैंक स्थापित किए और किसानों को 80 फीसदी सब्सिडी पर मशीनरी उपलब्ध करवाई। 

पराली न जलाने वाले किसानों को प्रति एकड़ मिले 2500 रुपये
डीसी रामबीर ने बताया कि पठानकोट के 570 किसानों को सम्मानित किया गया, उक्त किसानों के खातों में प्रति एकड़ 2500 के हिसाब से राशि दी गई, ताकि वह भविष्य में भी पराली को न जलाएं। इस मौके पर एडीसी अभिजीत कपलिश, एसडीएम अर्शदीप सिंह, एपीआरओ राम लुभाया, डीडीपीओ परमपाल सिंह, खेतीबाड़ी अफसर डॉ. हरिंदर बैंस, खेतीबाड़ी अफसर डॉ. अमरीक सिंह और अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। 





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