RNI NEWS :- भाखड़ा डैम से छोड़े पानी के कारण जलस्तर खतरे के निशान के पार पहुंचा,चारों और पानी ही पानी नजर आ रहा है

RNI NEWS :- भाखड़ा डैम से छोड़े पानी के कारण जलस्तर खतरे के निशान के पार पहुंचा,चारों और पानी ही पानी नजर आ रहा है

Punjab :- Tej Parkash Khasa,AS Sachdeva,Sabi Shahkot,Gurmit Billa Navab 

सतलुज नदी में भाखड़ा डैम से छोड़े गए पानी और भारी वर्षा के कारण स्वां नदी ने श्री आनंदपुर साहिब के दर्जनों गांवों को अपनी चपेट में ले लिया। गांव निक्कूवाल, महन्दली कलां, बुर्ज, चन्दपुर बेला, बल्लोवाल, गज्जपुर, हरीवाल का संपर्क बाहरी दुनिया से टूट गया। बचाव में एनडीआरएफ की टीमें जुटी हुई हैं। ब्लाक नूरपुरबेदी के गांव बस्सी गज्जपुर में सुरजीत सिंह, अजमेर सिंह और बचिंत सिंह के घर पानी से घिर गए हैं।प्रशासन की तरफ से इन परिवारों को बाहर निकालने के लिए कोशिशें की जा रही हैं। जानकारी के अनुसार पानी में घिरे गांव गज्जपुर में एक महिला को सांप ने काट लिया, जिसे एनडीआरएफ ने भाई भैता जी सिविल अस्पताल पहुंचाया। वहीं गांव लोदीपुर में एक व्यक्ति को दिल का दौरा पड़ गया। दोनों की हालत अब ठीक है। गांव दसगराईं की धोलां बस्ती में भी कई घरों में पानी घुस गया है।गांव घराट में पानी भरने के बाद शनिवार देर रात से ही लोग अपने घरों में फंस गए। पानी बढ़ता देख लोगों ने सारी रात छतों पर गुजारी। सुबह आठ बजे के बाद एनडीआरएफ की टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया जिसके बाद गांव से 150 लोगों को बाहर निकाला गया।पानी में घिरे गांव बुर्ज के निवासी सरबजीत सिंह, गुरमेल सिंह, पूर्व सरपंच जसविन्दर कौर, शेर सिंह, हरीवाल से जनरल सिंह, निर्मल सिंह, रघुबीर सिंह, निक्कूवाल से भुपिन्दर सिंह, जनरल सिंह सरपंच, भजन सिंह ने कहा कि पानी ने 1988 में आई बाढ़ याद करवा दी। लोगों ने मांग की कि दरिया और स्वां नदी का जल्द से जल्द नहरीकरण किया जाए और उन्हें फसलों व घरेलू सामान का मुआवजा दिया जाए।

कीरतपुर साहिब व कोटला गांव में भी बारिश का कहर

पिछलें दिनों से हो रही भारी बारिश के कहर से विश्व प्रसिद्ध नगरी कीरतपुर साहिब भी अछूती नहीं है।बारिश के कारण आम जनता का भारी नुक्सान हुआ है।लोग के घरों में यहां पानी घूसा है,वही कई दुकानदारों की दुकानों में पानी घूसने की खबर मिली है।जिस कारण उनका काफी नुक्सान हुआ है।वही गांव कोटला में भी बारिश ने अपना कहर ढहा है।तेज हुई बारिश के कारण यहां लोगों के घरों में पानी घूसा वही आदि अंनत काल से बने पहाडों के खिस्कनें से लोगों का काफी नुक्सान हुआ है।दर्जनों घरों में चिकनी मिट्टी व पड़ों के गिरने से लोगों का भारी नुक्सान हुआ है।

भाखड़ा डैम से छोड़े पानी के कारण जलस्तर खतरे के निशान के पार पहुंचा

भाखड़ा डैम से छोड़े जा रहे पानी के कारण सतलुज नदी का जलस्तर खतरे के निशान के पार पहुंच गया है। रुपनगर हैडवर्कस से 2 लाख 23 हजार क्यूसिक पानी छोड़ा जा रहा है जबकि सिरसा नदी से 25 हजार क्यूसिक के लगभग पानी आ रहा है। 1988 में आई बाढ़ के बाद इतना पानी देखा गया है। हैडवर्कस से 50 हजार क्यूसिक पानी आने पर लो लेवल फ्लड घोषित कर दिया जाता है। सतलुज नदी के किनारों पर बनी झुग्गियां उजड़ गई हैं और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।बुधकी नदी का बांध टूट जाने के कारण रोपड़-बेला मार्ग पूरी तरह से प्रभावित हो गया। इस मार्ग पर दरार आने के कारण लोग फंस गए। सड़कों पर तीन-तीन फुट पानी भर गया। इस मार्ग पर बसी मुस्लिम बस्तियों के लोग पानी में फंस गए।पानी का बहाव इतना तेज था कि प्रशासन द्वारा मंगवाई गई मोटर बोट का भी संतुलन बिगड़ गया। काफी मशक्कत बाद इस मोटर को एक किनारे पर लगाया गया और इसमें सवार लोगों को रस्सी की मदद से बाहर निकाला गया।प्रशासनिक अधिकारी भी एक ट्राली पर सवार दिखे। एनडीआरएफ की टीम आने पर प्रशासन ने राहत की सांस ली और मुस्लिम झुग्गियों में फंसे लोगों को बाहर निकाला गया। पानी के कारण गांव खैराबाद, फूल खुर्द और फूल कलां काफी प्रभावित हुए। इन गांवों के लोगों को ट्रैक्टरों की मदद से बाहर निकाला गया जबकि कुछ लोग अपने घरों की छतों पर चढे़ रहे।

नाराज लोगों ने लगाया मुख्य सड़क पर जाम
बाढ़ का पानी घुस जाने से नाराज कई गांवों के लोगों ने सुबह श्री आनंदपुर साहिब-श्री कीरतपुर साहिब मुख्य मार्ग पर जाम लगा दिया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। गांव घट्टीवाल के पास जाम लगाए बैठे लोगों ने बताया कि घरों में 4-4 फुट तक पानी आ गया है।खाने को कुछ भी नहीं, अगर हम जाम ना लगाएं तो ओर क्या करें। सूचना मिलते ही चौकी इंचार्ज समरजीत सिंह मौके पर आए और प्रशासन के साथ बात करवाने का वादा करके ग्रामीणों को समझाकर जाम खुलवाया।

पिछले 24 घंटों में भाखड़ा डैम के पीछे बनी विशाल गोबिंद सागर झील में दोगुना पानी आया

बीबीएमबी के चेयरमैन अभियंता दविंदर शर्मा ने कहा है कि भाखड़ा डैम के पीछे बनी विशाल गोबिंद सागर झील में पिछले 24 घंटों के दौरान हमारे अनुमान से दो गुना पानी आया है।भाखड़ा डैम के बढ़ते जल स्तर पर मैनेजमेंट कड़ी निगाह बनाए हुए है और हर एक घंटे के बाद भाखड़ा डैम के जलस्तर की मॉनिटरिंग की जा रही है। पत्रकारों से बातचीत में शर्मा ने कहा कि बीते 24 घंटों के दौरान झील में 3 लाख 11 हजार 134 क्यूसेक पानी आया जिसके चलते भाखड़ा डैम का जलस्तर 1679 फुट के पार चला गया है।उन्होंने कहा कि 1988 के बाद यह पहली बार हुआ है कि इतनी भारी मात्रा में पानी आया है। उन्होंने कहा कि हम 1.50 लाख क्यूसेक पानी आने की उम्मीद कर रहे थे। फिलहाल पंजाब में हो रही बारिश पर नजर रखी जा रही है।पंजाब में बारिश रुकती है तो भाखड़ा डैम से छोड़े जाने वाले पानी की रफ्तार को और बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बेशक भाखड़ा डैम में खतरे का निशान 1680 फुट का है लेकिन फिलहाल हमने 1682 फुट तक डैम के पानी को स्टोर करने का निर्णय किया है और मौसम विभाग के अनुसार अब बारिश भी थमने वाली है।

 नंगल-नैना देवी मुख्य मार्ग पर भूस्खलन

शनिवार रात भर हुई तेज बारिश के कारण उपमंडल के गांव सूरेवाल व सैहजोवाल में कई घरों में पानी घुस गया। गांव सूरेवाल निवासी जोगिंदर के अनुसार शनिवार रात 10 बजे घर में पानी घुसना शुरू हुआ था। गेट के आगे रेत के बोरे भी लगाए गए लेकिन सफलता नहीं मिली। भारी बारिश के चलते नंगल-भाखड़ा मुख्य मार्ग पर हुए भूस्खलन के चलते नंगल-नैना देवी मार्ग पूरी तरह बंद हो गया।जो भी बस नंगल से नैना देवी की और रवाना हुई वह बरमला चेक पोस्ट पर रोक दी गई। भारी बारिश के कारण गांव भाखड़ा में भी तबाही का आलम है। गांव प्रधान प्रभात चंदेल ने बताया कि भारी बारिश के कारण गांव के राजपाल चंदेल की पशुशाला पर पहाड़ से मलबा गिरने के कारण दो भैंसों की मौत हो गई। उपमंडल के गांव दबखेड़ा में भी बारिश के कारण घरों में दो दी फुट पानी घुस गया।

जिला रुपनगर प्रशासन की तरफ से अलर्ट जारी

हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के साथ सतलुज में पानी की मात्रा बढ़ने के कारण रुपनगर जिला प्रशासन की तरफ से अलर्ट जारी किया गया है। जिलों में बनाए फ्लड कंट्रोल रूम 24 घंटे काम कर रहे हैं। डीसी डॉ. सुमित जारंगल ने कहा कि समूचे क्षेत्र में माल विभाग के अधिकारी और कर्मचारी दिन रात ड्यूटी पर हैं। जिला कंट्रोल रूम का नंबर 01881-221157 है, जिस पर 24/7 संपर्क किया जा सकता है और लोग हर तरह की सूचना इस नंबर पर हासिल कर सकते हैं।

नवाशंहर के 60 गांवों को खाली करवाने के आदेश

शनिवार और रविवार को हुई बारिश के बाद सतलुज दरिया के साथ लगते गांवों में काफी पानी आ गया है। प्रशासन की ओर से जिले के 60 गांवों को खाली करने के आदेश जारी किए गए हैं। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए एनडीआरएफ की टीम को भी बुलाया गया है और एनडीआरएफ की टीमें नवांशहर और बलाचौर सब डिवीजन में भेज दी गई हैं। डीसी विनय बुवलानी व एसएसपी अल्का मीणा ने दरिया के साथ लगते गांवों का दौरा किया।

दरिया में समाई सड़कबिजली के टावर भी धराशायी

पठानकोट में भी भारी बरसात के बाद चक्की दरिया पूरे उफान पर है। रविवार सुबह तड़के चक्की दरिया किनारे वाली भदरोया रोड का 300 मीटर हिस्सा दरिया में समा गया, वहीं सड़क के किनारे लगे बिजली के बड़े-बड़े 2 टावर भी तिनके के समान धराशायी हो गए। टावरों के तार पठानकोट-जम्मू नेशनल हाइवे पर बिखर गए।वहीं पठानकोट-जालंधर हाइवे भी अवरुद्ध हो गया। हाइवे पर हाई वोल्टेज तार के कारण दोनों ओर वाहनों की लंबी लंबी कतारें लग गईं।  सूचना पाकर पहुंचे बिजली विभाग के कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद हाइवे से तार हटाकर मार्ग बहाल किया रणजीत सागर बांध (आरएसडी) की झील से माधोपुर हेड वर्क्स के जरिये पाकिस्तान की ओर पानी नहीं छोड़ा गया। बांध प्रशासन 2 यूनिटों को चलाकर नहरों में ही पानी छोड़ रहा है। आरएसडी के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर नरेश महाजन ने बताया कि चमेरा बांध प्रशासन ने 3 फ्लड गेट खोल रखे हैं, जिसके चलते हर घंटे आरएसडी झील में 80 हजार क्यूसेक पानी जमा हो रहा है।वहीं पाकिस्तान की ओर पानी छोड़ना बंद कर दिया है, नतीजतन झील का जलस्तर खतरे के निशान की ओर तेजी से बढ़ रहा है। रविवार शाम 5 बजे तक झील का जलस्तर 521.80 मीटर पहुंच गया था। अगर ऐसे ही हालात रहे तो सोमवार को फ्लड गेट खोलने पड़ेंगे।

फिरोजपुर के 52 अति संवेदनशील गांव खाली करवाने के निर्देश

रुपनगर हैडवर्कस से 2,40,930 क्यूसिक पानी छोड़े जाने के कारण डीसी चंद्र गैंद ने फिरोजपुर और जीरा तहसील से संबंधित एसडीएम को निर्देश जारी किए हैं कि वह इन तहसीलों से संबंधित निचले और संवेदनशील गांव में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए। एसडीएम को जिन गांव को खाली करवाने का निर्देश मिला है, उनमें 38 गांव फिरोजपुर तहसील और 20 गांव जीरा तहसील से संबंधित हैं।अतिसंवेदनशील गांवों का डीसी और एसएसपी फिरोजपुर विवेक एस. सोनी ने पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों के साथ दौरा किया। अधिकारियों को इन क्षेत्रों पर खास फोकस रखने के लिए कहा गया है। इन गांवों में मन्नो माछी, गट्टा दलेल, जमाली वाला, चक मन्नो माछी, गट्टा बादशाह, गत्ती हरिके,फेटेवाला, घुरम, वर काली रौन, अरेजा साबरा, कमलवाला, फतेहगढ़ सबरां, अशीए के, तन्ना बग्गा, हमदवाला, कमला मिद्दू, दूला सिंहवाला, मस्तेके, गुरदिती वाला, कालेके हिथार, रुकनेवाला, गत्ती चक जदीद, कमलवाला, तल्ली गुलाम, पल्ला मेघा, जम्मा मेघा गट्टी मटर, डोना मटर, कुतबद्दीनवाला, डोना राजा दीनानाथ, मेहमूद के मल हिथार, ठेठ घारा, बंडाला, अक्कूवाला, बाला मेघा, कालूवाला, गट्टी रहिमके, लंगियाना, डोना तेलु मल, गंदू किल्चा, दोना रहमत वाला, निहाले वाला, लमोचर, भांबा सिंह वाला, वीरां, निहाले वाला, हबीब के अली औलख और गंदू किलचा शामिल है।

जालंधर में बाढ़ संभावित 85 गांवों को खाली करने के आदेश

जालंधर के डीसी वरिंदर कुमार शर्मा ने बाढ़ संभावित 85 गांवों को खाली कराने का आदेश जारी किया है। यह आदेश भाखड़ा डैम से सतलुज नदी में एक लाख 89 हजार 940 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के मद्देनजर दिया गया है। डीसी वरिंदर कुमार शर्मा ने एसडीएम फिल्लौर व एसडीएम शाहकोट को तुरंत बाढ़ संभावित 85 गांवों को खाली कराने का आदेश दिया है। इनमें से 63 गांव शाहकोट, 13 गांव फिल्लौर व 9 गांव नकोदर सब डिवीजन में आते है।डीसी ने जिन गांवों को खाली कराने के आदेश जारी किए हैं, उनमें मेयोवाल, माऊ साहिब, खैरा बेट, लसारा, अचनचक्क, शोले बाजार, काडियाना, गन्ना पिंड, रायपुरा आरियां, सेलखियां, झंडापीर, भोलेवाल, भोड़ा, बुट्टे दा छन्ना, मदेदपुर, संगोवाल, गदरा बोडा और नक्कियां आदि शामिल हैं।

आपात स्थिति से निपटने के लिए रिलीफ सेंटर स्थापित 

डीसी ने कहा कि प्रशासन की तरफ से किसी भी प्रकार की आपदा से निपटने के लिए रिलीफ सेंटर स्थापित किए जा चुके हैं। लोगों को सुरक्षित जगहों पर भेजा गया है और जानवरों के लिए भी सूखी जगह का इंतजाम किया जा चुका है।
सेना के निरंतर संपर्क में है जिला प्रशासन

जिले में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के साथ निरंतर संपर्क में है। हेल्थ विभाग की टीमें पूरी तरह से मुस्तैद हैं।पावरकॉम विभाग को भी निर्विघ्न बिजली सप्लाई उपलब्ध करवाने की हिदायतें जारी की जा चुकी है।वहीं गांवों को खाली किए जाने के आदेश के बाद से शहरवासियों के मन में यह भय समा गया है कि बाढ़ की स्थिति बनने पर कहीं शहरों में भी पानी न भर जाए। लेकिन जिला प्रशासन का कहना है कि शहर के अंदर पानी आने की संभावना न के बराबर है। जहां तक सतलुज के आस-पास वाले गांवों का सवाल है, वहां पर 1 से 2 फुट पानी ही भरने की संभावना है।

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