Shashi Tharoor: लॉकडाउन पर राहुल गांधी के बाद शशि थरूर ने PM मोदी पर उठाया सवाल, बोले- ‘जनता हारी है’ – after rahul gandhi shashi tharoor raised question on pm modi about coronavirus lockdown, said – ‘the public is defeated’



कांग्रेस सांसद ने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट पर दो चित्रों को साझा करके नोटबंदी के दिनों और मौजूदा स्थिति की तुलना की। उन्होंने दिल्ली के आनंद विहार और गाजियाबाद के कौशाम्बी बस टर्मिनलों पर अपने मूल निवास स्थान पर लौटने के लिए लंबी कतार में खड़े प्रवासियों की भारी भीड़ की तुलना नोटबंदी के दौरान बैंकों के बाहर खड़ी भीड़ से की।

Abhishek Kumar | एजेंसियां | Updated:

कांग्रेस सांसद शशि थरूर।
हाइलाइट्स

  • लॉकडाउन पर कांग्रेस लगातार उठा रही है सवाल, राहुल गांधी के बाद शशि थरूर ने पीएम मोदी को घेरा
  • थरूर ने नोटबंदी में लगी लाइन और लॉकडाउन के दौरान दिल्ली के आनंद विहार जमा लोगों की तुलना की
  • कहा, पीएम ने बिना तैयारी के दोनों फैसले लिए, दोनों बार जानता ही हार रही है

नई दिल्ली

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने देशव्यापी लॉकडाउन की तुलना नोटबंदी से की है। उन्होंने कहा कि नोटबंदी और लॉकडाउन बिना तैयारी के साथ लागू किया गया। इसे लागू करने से पहले लोगों को पर्याप्त समय नहीं दिया गया। हिंदी में ट्वीट करते हुए थरूर ने कहा, ‘ना ही तब तैयारी थी और ना तो अब तैयारी है, तब भी जनता हारी थी, अब भी जनता हारी है। उस समय भी आम आदमी अंत में था और आज भी है।’

कांग्रेस सांसद ने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट पर दो चित्रों को साझा करके नोटबंदी के दिनों और मौजूदा स्थिति की तुलना की। उन्होंने दिल्ली के आनंद विहार और गाजियाबाद के कौशाम्बी बस टर्मिनलों पर अपने मूल निवास स्थान पर लौटने के लिए लंबी कतार में खड़े प्रवासियों की भारी भीड़ की तुलना नोटबंदी के दौरान बैंकों के बाहर खड़ी भीड़ से की।

एक तस्वीर पर उन्होंने नोटबंदी (डिमोनेटाइजेशन) लिखा और दूसरी पर ‘लॉकडाउन’ लिखा। कुछ घंटे पहले ही कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कोरोनावायरस फैलने के कारण 21 दिन के राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन की घोषणा से पहले कथित तौर पर कोई तैयारी नहीं करने के लिए हमला बोला था।

देश में 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा प्रधानमंत्री द्वारा संक्रामक कोविड-19 के फैलने की श्रृंखला को तोड़ने के लिए एक उपाय के रूप में की गई है। इसके बाद हजारों प्रवासी मजदूरों ने परिवहन सुविधा न मिलने पर पैदल ही दिल्ली छोड़ना शुरू कर दिया था।

हर साल 1200 करोड़ परोपकार पर खर्च

  • हर साल 1200 करोड़ परोपकार पर खर्च

    सिर्फ टाटा ट्रस्ट ही नहीं, इसके संरक्षण में चलने वाले जेएन टाटा एंडोमेंट, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट, सर रतन टाटा ट्रस्ट, लेडी टाटा मेमोरियल ट्रस्ट, लेडी मेहरबाई डी. टाटा एजुकेशन ट्रस्ट, जेआरडी और थेल्मा जे. टाटा ट्रस्ट आदि कुछ ऐसे नाम शामिल हैं जो दशकों से स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण रक्षा, सामुदायिक विकास जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। टाटा ट्रस्ट के प्रवक्ता देवाशीष राय का कहना है कि सामान्य हालात में ट्रस्ट हर साल करीब 1200 करोड़ परमार्थ के लिए खर्च करता है।

  • भारत के कुछ बेहतरीन संस्थान टाटा की देन

    टाटा समूह ने देश की आजादी से बहुत पहले ही राष्ट्र के के बारे में सोचना शुरू कर दिया था। तभी तो जमशेद जी टाटा ने वर्ष 1898 में इंडियन इंस्टीच्यूट आफ साइंस का खाका खींचा था, जिसका उद्देश्य में विज्ञान की अत्याधुनिक शिक्षा की व्यवस्था करना था। इसके लिए उस समय जमशेद जी ने अपनी आधी निजी संपत्ति दान दे थी, जिसमें मुंबई की 14 बिल्डिंग और चार लैंड प्रोपर्टी थी।

  • इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस का निर्माण कराया

    बाद में इसमें मैसूर के राजा भी जुड़े और उन्होंने बेंगलुरू में 300 एकड़ जमीन दी। तब जाकर 1911 में तैयार हुआ इंडियन इंस्टीच्यूट आफ साइंस, जिसमें विश्वेसररैया, सी वी रमन और डा. होमी जहांगीर भाभा जैसे दिग्गज जुड़े। ऐसा संस्थान उस समय इंग्लैंड में भी नहीं था। सी वी रमन को इसी संस्थान में काम करते हुए 1930 में भौतिकी में नोबल पुरस्कार मिला था। इसी से पता चलता है कि वहां किस तरह की अनुसंधान की सुविधा होगी। होमी जहांगीर भाभा ने इसी में काम करते हुए टाटा इंस्टीच्यूट आफ फंडामेंटल रिसर्च का सपना देखा और उसे भी टाटा समूह ने साकार किया। इस संस्थान ने भारत में परमाणु क्षेत्र में अनुसंधान का द्वार खोला।

  • कैंसर के इलाज के लिए टाटा मेमोरियल अस्पताल

    टाटा ट्रस्ट ने देश में कैंसर के इलाज के लिए भी शुरूआती प्रयास किया है। हुआ यह था कि सर दोराब जी टाटा की पत्नी मेहरबाई ल्यूकेमिया —ब्लड कैंसर— की वजह से असमय काल कलवित हुई थीं। इसके बाद 1932 में दि लेडी टाटा मेमोरियल ट्रस्ट बना और कैंसर चिकित्सा के लिए टाटा मेमोरियल हॉस्पीटल का खाका खींचा गया। यह हॉस्पीटल 1941 में बन कर तैयार हो गया था। यह कैंसर चिकित्सा का देश का पहला हॉस्पिटल था और आज इसकी अगुवायी में टाटा ने देश भर में नैशनल कैंसर ग्रिड बना दिया है, जिसे 114 कैंसर अस्पताल और रिसर्च सेंटर जुड़े हैं। कोलकाता का टाटा मेडिकल सेंटर भी इसी के तहत काम करता है।

  • देश भर में कैंसर की सुलभ चिकित्सा के लिए काम

    टाटा ट्रस्ट के प्रवक्ता का कहना है कि ट्रस्ट कैंसर की सस्ती और सुलभ चिकित्सा के लिए लगातार काम कर रहा है। इसी दिशा में सरकार के साथ मिल कर टियर वन, टियन टू और टियर थ्री सिटी में कैंसर सेंटर विकसित कर रहे हैं। यह भी परिकल्पना है कि देश के हर मेडिकल कॉलेज में कैंसर के देखभाल की सुविधा हो।

  • केरल बाढ़ में उल्लेखनीय काम

    अगस्त 2018 में जब केरल में अप्रत्याशित बाढ़ का प्रकोप हुआ था तो टाटा ट्रस्ट ने वहां के ग्रामीण इलाकों में पेयजल आपूर्ति का जिम्मा संभाला था। उसने हैदराबाद स्थित अपने सेंटर से तीन मोबाइल आरओ यूनिट वहां भेजा, जिससे कोच्चि, एलेप्पी, इडुकी और वायनाड जिलों के ग्रामीण इलाकों में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित हो सकी। उस दौरान टाटा समूह ने वहां दो लाख लीटर से अधिक पेय जल बांटा था।

  • भूखों को भोजन देने में भी आगे

    वनवासी इलाकों में आदिवासी बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए समूह ने अन्नपूर्णा सेंट्रलाइज्ड किचन प्रोजेक्ट शुरू किया है। इसके लिए उसने अक्षय पात्र से हाथ मिलाया है। यही नहीं, झारखंड और ओडिशा के जंगलों में टाटा समूह सैकड़ों विद्यालय अपने खर्चे पर चलाता है।

  • विटामिन की कमी न हो

    लोगों में विटामिन की कमी न हो, इसके लिए टाटा ट्रस्ट के मिल्क फाउंडेशन ने नैशनल डेरी डेवलपमेंट बोर्ड के साथ मिल कर करोड़ों लीटर दूध को विटामिन ए एवं ओ से फोर्टिफाइड कर रहा है। इससे 14 राज्यों के 4.8 करोड़ लोग रोज लाभान्वित होते हैं।

अचानक लॉकडाउन से भ्रम और भय पैदा हुआ

इससे पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार को कहा कि कोरोना वायरस से लड़ने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से किए गए अचानक लॉकडाउन के कारण काफी डर और भ्रम पैदा हो गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखे पत्र में उन्होंने गरीबों की दुर्दशा को उजागर किया और घातक बीमारी से लड़ने के लिए कुछ विकसित देशों द्वारा घोषित पूर्ण बंद के अलावा अन्य कदम उठाने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा, ‘यह समझना हमारे लिए महत्वपूर्ण है कि भारत की स्थितियां अलग हैं। हमें बड़े देशों की तुलना में अलग कदम उठाने होंगे जो पूरी तरह बंद की रणनीति अपना रहे हैं।’

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राहुल ने कहा कि भारत में दैनिक आय पर निर्भर करने वाले लोगों की संख्या बहुत ज्यादा है जिससे महामारी के परिप्रेक्ष्य में सभी आर्थिक गतिविधियों को एकतरफा रोक देना ठीक नहीं है। उन्होंने आशंका जताई, ‘पूरी तरह आर्थिक बंद से कोविड-19 के कारण मरने वालों की संख्या खतरनाक रूप से बढ़ जाएगी।’

राहुल गांधी ने पीएम नरेंद्र मोदी को लिखा पत्र, कहा- लॉकडाउन से लोगों में डरराहुल गांधी ने पीएम नरेंद्र मोदी को लिखा पत्र, कहा- लॉकडाउन से लोगों में डरकोरोना वायरस के कारण देशभर में लागू लॉकडाउन को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा है कि अचानक लॉकडाउन की घोषणा से लोगों में डर और भ्रम की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने पीएम से इस खतरे से निपटने के लिये कदम उठाने के लिये कहा है।

उन्होंने कहा, ‘अचानक बंद होने से काफी भय और भ्रम पैदा हो गया है।’ उन्होंने कहा कि फैक्टरियां, छोटे उद्योग और निर्माण स्थल बंद हो गए हैं और हजारों लोग कठिन यात्रा कर अपने गृह राज्यों में पहुंच रहे हैं। राहुल ने कहा कि मजदूरों को दैनिक मजदूरी नहीं मिल रही या पोषण एवं मूल सेवाएं हासिल नहीं हो रही हैं। यह महत्वपूर्ण है कि हम ऐसे लोगों को आश्रय ढूंढने में सहयोग कर सकें और सीधे उनके बैंक खाते में धन दें ताकि अगले कुछ महीने तक वे मुश्किलों का सामना कर सकें।

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कांग्रेस नेता ने कहा कि पूर्ण बंद होने से लाखों बेरोजगार युवक अपने गांवों की तरफ जाएंगे जिससे वे गांवों में रह रहे अपने बुजुर्ग माता-पिता और बुजुर्ग आबादी को संक्रमित कर सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘इसे जीवन की काफी क्षति होगी।’ उन्होंने कहा, ‘हमारी प्राथमिकता बुजुर्गों की रक्षा करना और उन्हें पृथक करना है और युवाओं को बुजुर्गों से नजदीकी के खतरे से आगाह करना है।’

Web Title after rahul gandhi shashi tharoor raised question on pm modi about coronavirus lockdown, said – ‘the public is defeated’(News in Hindi from Navbharat Times , TIL Network)

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