Supreme court to telecom companies: इस देश में काम नहीं करना चाहते हैं, टेलिकॉम कंपनियों पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी – supreme court to telecom companies not willing to do work in this country


Published By Tarun Vats | एजेंसियां | Updated:

हाइलाइट्स

  • टेलिकॉम कंपनियों द्वारा पैसे चुकाने में देरी पर सुप्रीम कोर्ट की बेहद तल्ख टिप्पणी
  • सुप्रीम कोर्ट ने भगुतान में देरी पर टेलिकॉम कंपनियों को फटकार लगाई, निदेशकों को नोटिस जारी
  • जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस एस, अब्दुल नजीर और जस्टिस एम. आर. शाह की पीठ ने सुनवाई की़
  • कंपनियों को दूरसंचार विभाग को 1.47 लाख करोड़ रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया था

नई दिल्ली

टेलिकॉम कंपनियों द्वारा बकाए के भुगतान में देरी पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट काफी सख्त नजर आया। कंपनियों द्वारा पैसे चुकाने में देरी पर बेहद तल्ख नजर आ रहे जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा कि वह इस देश में ऐसे काम नहीं करना चाहते हैं। क्या सुप्रीम कोर्ट की वैल्यू नहीं है?

बता दें कि कोर्ट ने भगुतान में देरी पर टेलिकॉम कंपनियों को फटकार लगाई और कंपनियों के निदेशकों को नोटिस जारी कर पूछा कि भुगतान के आदेश का पालन नहीं किए जाने के कारण उन पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की जाए?

पढ़ें, सुप्रीम कोर्ट की फटकार, क्या देश में कानून नहीं?

जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस एस, अब्दुल नजीर और जस्टिस एम. आर. शाह की पीठ ने सुनवाई करते हुए कई तल्ख टिप्पणी की। जस्टिस मिश्रा ने कहा, ‘देश में कोई कानून नही बचा है। मैं इस देश मे इस तरह काम नही करना चाहता। मैं जिम्मेदारी से ये कह रहा हूं। क्या सुप्रीम कोर्ट का कोई वैल्यू नही है? ये मनी पावर का परिणाम है। ये इस देश में क्या हो राह है। ये कंपनियां एक पैसे नहीं दिए और आपका अधिकारी सुप्रीम कोर्ट का आदेश स्टे कर देता है।’

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट एजीआर बकाये का भुगतान करने के आदेश का अनुपालन नहीं करने वाले मामले की सुनवाई कर रहा था। पीठ ने कहा, ‘हमें नहीं मालूम कि कौन ये बेतुकी हरकतें कर रहा है, क्या देश में कोई कानून नहीं बचा है। बेहतर है कि इस देश में ना रहा जाए और देश छोड़ दिया जाए।’

अयोध्या: सुप्रीम कोर्ट के फैसले का यूं हो रहा था इंतजार

  • अयोध्या: सुप्रीम कोर्ट के फैसले का यूं हो रहा था इंतजार

    70 साल तक चली कानूनी लड़ाई के बाद शनिवार को अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया है। राजनीतिक रूप से संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की पीठ ने सर्वसम्मति यानी 5-0 से रामलला विराजमान के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने आगे कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को कहीं और 5 एकड़ की जमीन दी जाए। जिस वक्त यह फैसला सुनाया जा रहा था, उस वक्त कई लोगों की धड़कनें बढ़ी हुई थीं। इनमें नेताओं से लेकर साधु-संत भी शामिल हैं। देखें, फैसले के वक्त सब कैसे टीवी-मोबाइल से चिपके हुए थे…

  • ​मुख्यमंत्री योगी ने टीवी पर देखा फैसला

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने टॉप अफसरों के साथ बैठकर अयोध्या पर फैसले को लाइव देखा।

  • ​मनोज तिवारी ने घर पर देखा फैसला

    दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष ने अपने घर पर टीवी पर देखा फैसला। बाद में एक विडियो संदेश जारी कर लोगों को बधाई दी और सभी से शांति बनाए रखने की अपील की।

  • ​फैसला सुनते वक्त रो पड़ीं साध्वी ऋतंभरा

    जिस वक्त फैसला सुनाया जा रहा था, साध्वी ऋतंभरा की आंखें नम थीं।

  • ​अयोध्या में साधु-संतों ने मोबाइल पर देखा

    सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या पर फैसले के दौरान कुछ इस अंदाज में दिखे साधु-संत

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक डेस्क अधिकारी अटॉर्नी जनरल और अन्य संवैधानिक प्राधिकरणों को पत्र लिखकर बता रहा है कि उन्हें दूरसंचार कंपनियों द्वारा बकाये के भुगतान पर जोर नहीं देना चाहिए। तल्ख टिप्पणी में न्यायालय ने कहा, ‘‘यदि एक डेस्क अधिकारी न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने की धृष्टता करता है तो फिर सुप्रीम कोर्ट को बंद कर दीजिए।’

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कोर्ट ने कहा, ‘हमने एजीआर मामले में समीक्षा याचिका खारिज कर दी, लेकिन इसके बाद भी एक भी पैसा जमा नहीं किया गया। देश में जिस तरह से चीजें हो रही हैं, इससे हमारी अंतरआत्मा हिल गई है।’ उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने एजीआर बकाये को लेकर सुनवाई करते हुए दूरसंचार कंपनियों तथा कुछ अन्य कंपनियों को दूरसंचार विभाग को 1.47 लाख करोड़ रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया था। इसके भुगतान की समयसीमा 23 जनवरी थी।



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