Urjit Patel Told About Clash With Government On Bankruptcy Law In His Book Overdraft Saving The Indian Saver – पूर्व Rbi गवर्नर उर्जित पटेल ने साधा Upa सरकार पर निशाना, कहा लचर निगरानी से बढ़ा Npa



बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 25 Jul 2020 12:52 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल

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भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल ने खुलासा किया है कि जब वे केंद्रीय बैंक के गवर्नर थे, तब दिवालिया मामलों को लेकर उनकी सरकार के साथ अनबन हुई थी। इस संदर्भ में पटेल ने अपनी किताब ‘ओवरड्राफ्ट: सेविंग द इंडियन सेवर’ में लिखा कि सरकार ने उस वक्त बैंकरप्सी लॉ के नियमों को ढीला करने का आदेश दिया था, जिसपर वे राजी नहीं थे।

लचर निगरानी से बढ़ा NPA
पटेल ने पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार को एनपीए के लिए दोषी ठहराया है। उन्होंने अपनी किताब के उद्घाटन मौके पर कहा कि 2014 से पहले यूपीए सरकार व आरबीआई की निगरानी बेहद सुस्त थी। इससे एनपीए में तेज वृद्धि आई, जिसका खामियाजा अब देश का बैंकिंग सेक्टर भुगत रहा है। उन्होंने फरवरी 2018 में दिवालिया मामले पर जारी नोटिस को गवर्नर पद छोड़ने का कारण बताया। 

पटेल ने पांच सितंबर 2016 को आरबीआई के 24वें गवर्नर के रूप में पद संभाला था। निजी कारणों का हवाला देते हुए, पटेल ने 10 दिसंबर 2018 को आरबीआई के गवर्नर के पद से इस्तीफा दे दिया था। उस दौरान उनका 10 महीने का कार्यकाल बचा हुआ था। उनके कार्यकाल के दौरान आरबीआई और सरकार कई नीति-संबंधित मामलों पर विरोधाभासी रहे। 

पटेल की फिर हुई वापसी, मिली ये नई जिम्मेदारी
मालूम हो कि उर्जित पटेल की एक बार फिर सरकार में वापसी हो गई है। पटेल को भारत के प्रमुख आर्थिक थिंक टैंक ‘राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान’ (एनआईपीएफपी) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।पटेल ने लगभग छह सालों तक एनआईपीएफपी की कमान संभालने वाले पूर्व नौकरशाह विजय केलकर की जगह ली। उन्होंने 22 जून को पद संभाला और उनका कार्यकाल चार साल का होगा। 

भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल ने खुलासा किया है कि जब वे केंद्रीय बैंक के गवर्नर थे, तब दिवालिया मामलों को लेकर उनकी सरकार के साथ अनबन हुई थी। इस संदर्भ में पटेल ने अपनी किताब ‘ओवरड्राफ्ट: सेविंग द इंडियन सेवर’ में लिखा कि सरकार ने उस वक्त बैंकरप्सी लॉ के नियमों को ढीला करने का आदेश दिया था, जिसपर वे राजी नहीं थे।

लचर निगरानी से बढ़ा NPA

पटेल ने पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार को एनपीए के लिए दोषी ठहराया है। उन्होंने अपनी किताब के उद्घाटन मौके पर कहा कि 2014 से पहले यूपीए सरकार व आरबीआई की निगरानी बेहद सुस्त थी। इससे एनपीए में तेज वृद्धि आई, जिसका खामियाजा अब देश का बैंकिंग सेक्टर भुगत रहा है। उन्होंने फरवरी 2018 में दिवालिया मामले पर जारी नोटिस को गवर्नर पद छोड़ने का कारण बताया। 

पटेल ने पांच सितंबर 2016 को आरबीआई के 24वें गवर्नर के रूप में पद संभाला था। निजी कारणों का हवाला देते हुए, पटेल ने 10 दिसंबर 2018 को आरबीआई के गवर्नर के पद से इस्तीफा दे दिया था। उस दौरान उनका 10 महीने का कार्यकाल बचा हुआ था। उनके कार्यकाल के दौरान आरबीआई और सरकार कई नीति-संबंधित मामलों पर विरोधाभासी रहे। 

पटेल की फिर हुई वापसी, मिली ये नई जिम्मेदारी
मालूम हो कि उर्जित पटेल की एक बार फिर सरकार में वापसी हो गई है। पटेल को भारत के प्रमुख आर्थिक थिंक टैंक ‘राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान’ (एनआईपीएफपी) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।पटेल ने लगभग छह सालों तक एनआईपीएफपी की कमान संभालने वाले पूर्व नौकरशाह विजय केलकर की जगह ली। उन्होंने 22 जून को पद संभाला और उनका कार्यकाल चार साल का होगा। 



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